कार्यक्रम में पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़।
लखनऊ। पूर्व मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ के मुताबिक, कानून समय के साथ विकसित होते हैं। पिछले निर्णय गलतियों को सुधारने के लिए नहीं होते हैं। इनका मकसद यह सुनिश्चित करना होता है कि कानून जिस समाज की सेवा करता है, उसके लिए प्रासंगिक बना रहे। पूर्व मुख्य न्यायाधीश शनिवार को आईआईएम लखनऊ में आयोजित मैनफेस्ट-वर्चस्व के लीडरशिप कार्यक्रम में बोल रहे थे।
डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ ने अपने कॉलेज के दिनों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि इमरजेंसी लागू होने के ठीक बाद जुलाई में उन्होंने कॉलेज में दाखिला लिया था। उस समय लोगों में डर का माहौल था। यहां तक कि कॉलेज में रैगिंग तक बंद हो गई थी। उस समय के माहौल को देखकर लोकतंत्र की अहमियत पता चली थी।
उन्होंने कहा कि जीवन में सबसे बड़ी संतुष्टि दूसरों की सेवा करनी है। लैंगिक समानता और एलजीबीटीक्यू के अधिकारों के प्रमुख मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करते हुए डॉ. चंद्रचूड़ ने कहा कि उनके न्यायालय में लैंगिक असमानता कभी बर्दाश्त नहीं की गई। इस दौरान उन्होंने अपने कॅरिअर के दौरान सामने आए कठिन मुकदमों की भी चर्चा की।
उन्होंने 80 साल से ज्यादा उम्र के दंपती के तलाक के मुकदमे का भी जिक्र किया। बहस के दौरान पति-पत्नी बुरी तरह से लड़ रहे थे और उनकी बेटी बोल रही थी कि जीवन ढभर समझाया, अब तो कोर्ट ही इनका फैसला करे।