मुनियापुर गांव में जहरीली शराब का शिकार हुए लोगों के परिवारीजनों से पूछताछ करते एसडीएम सदर
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साल 2015, तारीख 11 जनवरी। वो रविवार का मनहूस दिन था जब जिले के निकटवर्ती ग्रामीण इलाकों में जहरीली शराब पीने वाले 55 लोगों को मौत ने अपने आगोश में ले लिया था। तीन साल बाद भी परिवार वाले उनकी मौत का गम भुला नहीं सके हैं। उन्हें याद कर बरबस ही आंखें भर आती हैं। बुधवार को बाराबंकी में जहरीली शराब से 11 मौतों ने इनके जख्म को हरा कर दिया। ऐसे में अहम सवाल यह है कि आखिर जहरीली शराब से मौतों का यह सिलसिला कब थमेगा।
बीकेटी, इटौंजा के गांवों में सीमावर्ती जिलों में बनने वाली देसी शराब धड़ल्ले से बिक रही है तो निगोहां के गांवों में उन्नाव के असरेंदा की अवैध शराब चोरी-छिपे लाई जा रही है। नगराम में पुलिस की सख्ती के बाद भी यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। बेहटा किनारे बसे गांवों में तो शाम होते ही शराब की दुकानें सज जाती हैं।
बीकेटी-इटौंजा : सीमावर्ती जिलों से चल रहा अवैध धंधा
बीकेटी व इटौंजा थानाक्षेत्रों के कई गांवों में सीमावर्ती जिले सीतापुर व हरदोई के गांवों में बनने वाली देसी शराब बेची जाती है। कभी-कभार चलाए जाने वाले अभियानों के दौरान दो-तीन लोगों को पकड़कर पुलिस रस्म अदायगी कर देती है। हालांकि बीकेटी के प्रभारी तेजप्रकाश सिंह व इटौंजा के एसएसआई गिरीशचंद्र पांडेय का कहना है कि उनके क्षेत्र में अवैध शराब नहीं बनाई जाती। कुछ लोग चोरी-छिपे अन्य जगहों से खरीद कर देसी शराब की बिक्री करते हैं, तो कार्रवाई की जाती है।
बाराबंकी में विलाप करते मृतकों के परिवारीजन
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उन्नाव के असरेंदा में बनने वाली अवैध जहरीली शराब चोरी-छिपे निगोहां लाई जाती है और धड़ल्ले से रंजीतखेड़ा, बैरी, बरवलिया, उतरावां, रानीखेड़ा सहित कई गांवों में बिकती है। ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस कार्रवाई तो करती है, लेकिन अवैध धंधेबाजों पर फर्क नहीं पड़ता। 2016 में होली के दौरान जहरीली शराब के साथ पकड़े जाने पर तस्करों ने दो सिपाहियों रामसिंह, आलोक को घायल कर दिया था।
नगराम : धड़ल्ले से फल-फूल रहा अवैध कारोबार
इलाके के करोरा बहरौली, भजाखेड़ा, खतौनी, खवासखेड़ा, हरदोईया, मितौली, कनेरी और नगराम में अवैध शराब का कारोबार करने वाले फल-फूल रहे हैं। पिछली जुलाई से लेकर दिसंबर तक हुई कार्रवाई में पुलिस ने अवैध धंधेबाजों करोरा निवासी अरविंद व फूलमती, खवास खेड़ा निवासी प्रकाश, असलमनगर निवासी प्रमोद, छतौनी के पुष्प राजू व सुनील को रंगे हाथ दबोचा था। इसके बावजूद अवैध शराब के कारोबार पर कोई असर नहीं पड़ा।
बाराबंकी में जांच करने पहुंचे अपर पुलिस अधीक्षक।
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काकोरी के दोना गांव निवासी मजदूर रमेश मौर्या (38) की मौत वर्ष 2015 के दतली कांड में हुई थी। वहीं, बीती जनवरी में शाहपुर गांव में अधिक शराब पीने से बुजुर्ग की मौत हो गई थी। इसके बावजूद काकोरी में दुबग्गा की कई कॉलोनियों सहित बेहटा किनारे बसे गांवों खालिसपुर, लुधौसि, अल्लूपुर, मंडौली, बुधाड़िया, दशहरी, मौरा, बड़ा गांव, काजीखेड़ा व गोमती किनारे बसे सैथा, जेहटा, मौरा समेत दर्जनों गांवों में धड़ल्ले से कच्ची शराब बनाई जाती है। ग्रामीणों के अनुसार, शाम होते ही धंधेबाज बागों में बनी झोपड़ी व बेहटा नाले किनारे अपनी दुकानें सजाने लगते हैं। पुलिस भी सुविधा शुल्क लेकर कार्रवाई नहीं करती।
माल : पुलिस की नाक के नीचे धधक रहीं भट्ठियां
इलाके में पुलिस की नाक के नीचे बड़े पैमाने पर जहरीली शराब बनाने की भट्ठियां धधक रही हैं। इन पर अंकुश लगा पाने में पुलिस व आबकारी विभाग नाकाम साबित हुआ है। बड़ी संख्या में नौजवान जहरीली शराब की गिरफ्त में आ रहे हैं।
अवैध धंधेबाज शराब को अधिक नशीली बनाने के लिए धतूरा, यूरिया, पशुओं का दूध उतारने वाले ऑक्सीटॉसिन इंजेक्शन, नींद की टैबलेट तथा अन्य जानलेवा रसायनों का इस्तेमाल करते हैं। शाहमऊ, गौरैया बाजार, गांव हरिहरपुर, सुरतीखेड़ा, थरी, आउमउ, बहरौरा, देवरी आदि दर्जनों गांवों में जहरीली शराब का धंधा बड़े पैमाने पर चल रहा है।
बाराबंकी में मृतकों के परिवारीजन।
पुलिस ने सालभर में इंद्रजीत खेड़ा व भरदुआ समेत कई गांवों में 17 भट्ठी, 1951 लीटर कच्ची शराब व भारी मात्रा में लहन बरामद कर 101 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। सख्ती के चलते अवैध शराब के धंधे को छोड़कर लोग दूसरे कामों में लग गए हैं। सीमावर्ती जिलों से लाकर मोहनलालगंज इलाके में शराब बेचने पर भी लगाम लगी है।