केंद्र सरकार ने सभी प्रकार की सब्सिडी सीधे लाभार्थियों में खाते में दिए जाने की योजना की घोषणा भले ही कर दी हो, पर अभी हाल फिलहाल इस योजना के यूपी में साकार होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
जनवरी 2014 में यह योजना शुरू न हो पाने से दूसरे चरण की कार्ययोजना पर भी असर पड़ने के आसार बढ़ गए हैं।
आम आदमी के हक में हो रही बंदरबांट रोकने वाली केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को लागू करने में प्रदेश प्रशासन की चूक को कांग्रेसियों ने लोकसभा चुनाव में मुद्दा बनाने की तैयारी शुरू कर दी है।
बढ़ती महंगाई के बीच भ्रष्टाचार से गरीब व मध्यम वर्ग को निजात दिलाने वाली महत्वाकांक्षी डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफार्मर योजना पर बीते दो साल में दस प्रतिशत भी कार्य नहीं हो पाया है।
इस योजना के तहत शहर से लेकर गांव तक के मध्यम व वीपीएल वर्ग को सीधे लाभ मिलने में सूबे का प्रशासनिक अमला ही आड़े आ गया।
चार साल पहले केंद्र सरकार ने यूपी में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण को सक्रिय कर दिया था।
जिसके माध्यम से हर व्यक्ति को यूनिक आइडेंडटी नंबर जारी कर उसे ऑनलाइन बैंकिंग से जोड़ने की पहल की थी।
जिसके तहत हर परिवार का बायोमीट्रिंक रजिस्ट्रेशन करना वर्ष 2009 में शुरू करवाया था। जिसके तहत बैंक व अन्य विभागों को सेवा प्रदाता बनाकर आधार कार्ड बनाए जाने थे।
तत्कालीन प्रदेश सरकार ने निर्धारित अवधि में रजिस्ट्रेशन का कार्य पूरा करने के लिए सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया।
इसके बाद वर्ष 2012 में विधान सभा चुनाव के कारण रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया बाधित हो गई।
इस प्रक्रिया को दोबारा इस साल एक जनवरी को राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने अपना रजिस्ट्रेशन कर शुरू किया।
इसके बाद यह अभियान रस्म अदायगी तक सिमट कर रह गया। राजधानी सहित पूरे प्रदेश में 20 फीसदी भी रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाए।
जबकि यह रजिस्ट्रेशन इस दिसंबर माह के अंत तक पूर्ण कर लिए जाने थे।
हालात यह हैं कि रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया अधर में होने से आमजन को सब्सिडी में होने वाले बंदरबांट से हाल फिलहाल निजात मिलना मुश्किल हो गया है।
आम लोगों से जुड़ी इस योजना की खराब प्रगति से कांग्रेसियों को जनता के बीच प्रदेश सरकार की मंशा पर सवाल उठाने का नायाब मुद्दा हाथ लगा है।