भाजपा से निष्कासित नेता दयाशंकर सिंह को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। उन्हें एडीजे-4 कोर्ट से 50-50 हजार के दो मुचलकों पर जमानत दे दी गई है। बता दें कि मायावती के लिए अपशब्द कहने वाले दयाशंकर सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई थी।
कई दिन फरार रहने के बाद दयाशंकर को बिहार के बक्सर से गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज थाने में दर्ज एफआईआर को मऊ स्थानांतरित कर दिया गया था। डीआईजी ने बताया था कि घटनास्थल मऊ होने के कारण ऐसा किया गया है।
पुलिस ने दयाशंकर को सीजेएम कोर्ट में पेश किया, जहां अंतरिम जमानत रद्द करके न्यायालय ने उसे जेल भेज दिया था। शनिवार शाम मऊ एससी-एसटी कोर्ट से उन्हें जमानत दे दी गई।
इन धाराओं में दर्ज हुआ था मामला
दयाशंकर सिंह को गिरफ्तार कर ले जाती पुलिस
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अाला अफसरों के मुताबिक, हजरतगंज से स्थानांतरित मामले को शहर कोतवाली मऊ में अपराध संख्या 1419/36 पर आईपीसी की धारा 504, 509, 153 ए एससीएसटी के तहत दर्ज कर किया गया था।
दयाशंकर ने एडीजे-4 कोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दी थी। अपर सत्र न्यायाधीश डॉ. अजय कुमार ने बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष को सुनने के बाद इस मामले की सुनवाई के लिए छह अगस्त की तारीख मुकर्रर की थी।
ये था मामला
दयाशंकर सिंह
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बता दें कि मऊ में एक कार्यक्रम के दौरान उस वक्त बीजेपी के यूपी उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह ने बसपा सुप्रीमो पर टिकट बेचने का आरोप लगाया था। इस दौरान उन्होंने मायावती के लिए अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया था। इस कार्यक्रम का वीडियो वायरल होते ही मामले ने तूल पकड़ लिया। भाजपा ने दयाशंकर को उपाध्यक्ष पद से हटा दिया।
दवाब बढ़ने पर उनकी पार्टी से भी छुट्टी कर दी गई। विरोध बढ़ने पर दयाशंकर के खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज थाने में रिपोर्ट भी दर्ज करवाई गई। इसके विरोध ने बसपा ने भी अगले दिन लखनऊ में जमकर उत्पात मचाया। प्रदर्शन के दौरान बसपाइयों ने भी दयाशंकर की मां, पत्नी, बहन और बेटी के खिलाफ अपशब्द कहे। बेटी को अपशब्द कहने पर दयाशंकर के परिवारवालों ने बसपाइयों के खिलाफ भी पॉक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज करवा दिया है।