केंद्रीय गृह राज्यमंत्री आरपीएन सिंह ने कहा है कि कुख्यात आतंकी यासीन भटकल और उसके साथ पकड़े गए असदुल्लाह अख्तर उर्फ हड्डी की गिरफ्तारी आईबी और एनआईए की बड़ी उपलब्धि है।
इससे पहले इन्हीं एजेंसियों ने अब्दुल करीम टुंडा को पकड़ा था। इन सबके गिरफ्त में आने से देश में आतंकवाद फैलाने वाले नेटवर्क की कमर जल्द ही तोड़ दी जाएगी।
इंडियन मुजाहिदीन को भी खत्म करने में मदद मिलेगी। तमाम आतंकी घटनाओं का खुलासा होगा और इन्हें अंजाम देने वाले चेहरों पर से भी पर्दा उठेगा। मोस्ट वांटेड दाऊद इब्राहिम भी जल्द ही हमारी गिरफ्त में होगा।
कांग्रेस के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए आरपीएन सिंह रविवार को यहां पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
मोस्ट वांटेड आतंकियों की गिरफ्तारी तक जारी रहेगी कार्रवाई।
सिंह ने बताया कि यूपीए सरकार देश के मोस्ट वांटेड सभी 10 आतंकियों की गिरफ्तारी की कोशिश में है। केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने अभी हाल ही इंटरपोल के सम्मेलन में दाऊद को भारत के सुपुर्द करने का मामला उठाया है।
उम्मीद है कि दाऊद जल्द ही हमारी गिरफ्त में होगा। जब तक आखिरी मोस्ट वांटेड आतंकी नहीं पकड़ा जाएगा, कार्रवाई जारी रहेगी।
भाजपा अपने दामन में झांके
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री ने कहा कि भटकल और हड्डी से पूछताछ में मुंबई के झावेरी बाजार विस्फोट, दिल्ली और हैदराबाद ब्लास्ट की घटनाओं का भी खुलासा होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। भाजपा को यूपीए सरकार पर आतंकियों के साथ नरमी बरतने का आरोप लगाने से पहले अपने दामन में झांक लेना चाहिए। उसने तो देश की सुरक्षा को दांव पर लगाकर आतंकियों से नरमी बरती।
पड़ोसी देशों का रुख भी सहयोगात्मक
सिंह ने कहा कि आतंकियों पर कार्रवाई के मामले में केंद्रीय खुफिया एजेंसियां लगातार सक्रिय हैं। हाल के कुछ महीनों में इन एजेंसियों को मिली कामयाबी तारीफ के काबिल है।
नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका सहित कुछ पड़ोसी देशों का नजरिया बदला है। इनका रुख भारत में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले संगठनों के धरपकड़ को लेकर सहयोगात्मक है। इस सिलसिले में पाकिस्तान से भी बात हो रही है।
आईबी व सीबीआई में तनातनी नहीं
उन्होंने आईबी और सीबीआई के बीच तनातनी को निराधार बताया। कहा कि दोनों अपना-अपना काम कर रही हैं।
दोनों के बीच तनातनी या झगड़ा जैसा मामला प्रचारित करना मीडिया और उसमें भी खास तौर से न्यूज चैनलों का गढ़ा हुआ है। इसमें बिल्कुल सच्चाई नहीं है।
दोनों एजेंसियां अच्छा काम कर रही हैं। अफसोस की बात है कि कुछ राजनीतिक दल और न्यूज चैनल इनके बीच तनातनी की बात प्रचारित कर रहे हैं। केंद्रीय खुफिया एजेंसियों पर फेल होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इन आरोपों में कोई दम नहीं है।