चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि साइटोमेगालो वायरस लोगों के शरीर में निष्क्रिय रूप में पड़ा रहता है। वहीं, कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। कुछ मरीजों को स्टेरॉयड सहित अन्य दवाएं दी गई है। इस वजह से पोस्ट कोविड मरीजों में साइटोमेगालो वायरस के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
इसी तरह लिवर की बीमारियों से पीड़ित लोगों, कैंसर व एड्स के मरीजों और किडनी ट्रांसप्लांट कराने वालों को इस वायरस का खतरा ज्यादा रहता है। इसकी चपेट में आने वाले मरीजों के पेट में दर्द होता है और मल के साथ खून आने लगता है।