मुकुल गोयल के आगामी विधानसभा ही प्रमुख चुनौती रहेगा। उतर प्रदेश में अभी तक मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच ही माना जा रहा है। मुकुल गोयल समाजवादी पार्टी की सरकारों में अहम पदों पर तैनात रहे हैं। सरकार मुलायम सिंह की रही हो या अखिलेश यादव की। दोनों ही सरकारों में अहम पदों पर तैनात रहे।
2007 में जब मायावती की सरकार बनी तो उससे पहले ही वह केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चले गए थे। सपा सरकार बनने के बाद वह केंद्र से सितंबर 2012 में वापस यूपी आए थे। अब देखना दिलचस्प होगा कि पक्ष और विपक्ष के बीच मुकुल गोयल खुद को कितना एडजस्ट कर पाते हैं।
पश्चिमी उतर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के रहने वाले मुकुल गोयल अपने बेहतर नेतृत्व के लिए जाने जाते हैं। माना जा रहा है कि मुकुल गोयल की तैनाती पश्चिमी उतर प्रदेश में किसान आंदोलन की वजह से हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए की गई है।
2013 में मुजफ्फरनगर में हुए दंगों के बाद समाजवादी पार्टी की सरकार ने अपर पुलिस महानिदेशक के पद से अरुण कुमार को हटाकर मुकुल गोयल को ही जिम्मेदारी सौंपी थी। हालांकि समाजवादी पार्टी को इसका कोई लाभ चुनावों में नहीं मिला था।