एसपी साइबर क्राइम प्रो. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक इतनी बड़ी रकम को उड़ाने केलिए आरोपियों ने एक गिरोह बनाया। जिसमें बैंक के अधिकारी, कर्मचारीं और कंपनी के मालिक शामिल हुए। इसके बाद किन खातों में रकम है। इसकी जानकारी की गई। फिर रिटायर्ड कर्मचारी की मदद से बड़े फर्म के खातों में करोड़ों रुपये की रकम ट्रांसफर की गई। इसके लिए बैंक के अंदर काम करने वाले पूर्व व वर्तमान कर्मचारियों ने काफी दिनों तक रेकी की। ताकि आसानी से रकम ट्रांसफर किया जा सके। वारदात के लिए जानबूझकर शनिवार का दिन चुना गया। इस दिन बैंक बंद रहता है। सबसे अधिक रकम 74 करोड़ रुपये भूमिसागर कंस्ट्रक्शन और सागर सोलर प्रा. लि. फर्म के खातों में भेजी गई।
इनकी भूमिका संदिग्ध, हुए निलंबित
इतनी बड़ी रकम की हेराफेरी की जांच विभागीय जांच शुरू हुई तो शुरूआती पड़ताल में दस कर्मचारियों व अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध मिली। इसके आधार पर निलंबित कर दिया गया। निलंबित अधिकारियाें व कर्मचारियों में महाप्रबंधक (एनएडी) अशोक कुमार, महाप्रबंधक वित्त केडी पाठक, उपमहाप्रबंधक (एनएडी) राजनाथ सिंह, सेक्सन आफिसर ध्रुवराज, प्रबंधक (एनएडी) मेवालाल , प्रबंधक (सामान्य) अजय कुमार, सहायक प्रबंधक (आरटीजीएस सेल) अजय कुमार, कैशियर/सहायक विकास पांडेय व सुरक्षाकर्मी विजय बहादुर मौर्य शामिल है।
पूर्व प्रबंधक ने कई थी डाटा से छेड़छाड़
बैंक प्रबंधक की जांच के मुताबिक 15 अक्टूबर को सुबह 8.30 बजे से 09.30 बजे के बीच बैंक के पूर्व प्रबंधक इंदिरानगर निवासी आरएस दुबे एक साथी के साथ आए थे। जिनको गार्ड शैलेंद्र ने रोका भी था। इस पर उन्होंने बैंक मुख्यालय के 8वें तल स्थित एनएडी अनुभाग में आने की बात कही। जानकारी के बाद सीसीटीवी फुटेज चेक करने पर इन लोगों के कंप्यूटर विभाग में जाते और पीसी को ऑन कर छेड़छाड़ करता हुआ पाया गया।