आशियाना निवासी दीपा मिश्रा ने लॉकडाउन के दौरान हजरतगंज स्थित रेस्टोरेंट से ऑनलाइन खाने का पैकेट मंगाना चाहा। नेट पर रेस्टोरेंट की साइट पर गईं और 200 में दो प्लेट खाने का ऑर्डर किया। कुछ देर बाद साइबर जालसाजों ने फोन किया और झांसे में लेकर 26000 रुपये ठग लिए। उन्होंने आशियाना थाने में मुकदमा दर्ज कराया।
केस-2
इंदिरा नगर निवासी नीतू वर्मा के मोबाइल पर कुछ दिन पहले एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को बैंककर्मी बताया और खाता अपडेट करने के नाम पर ओटीपी हासिल की। कुछ ही देर में खाते से 15000 रुपये साफ हो गए। पीड़ित ने मुकदमा दर्ज कराया। मामले की जांच साइबर सेल कर रही है।
केस-3
रकाबगंज निवासी जितेंद्र कुमार को कुछ दिन पहले साइबर जालसाजों ने अपनी बातों में फंसा कर ओटीपी हासिल की और तीन बार में उनके खाते से 30000 रुपये साफ कर दिए। इसकी जांच साइबर सेल कर रही है।
गोमती नगर के विशाल खंड निवासी पार्थ रस्तोगी से साइबर जालसाजों ने ओटीपी हासिल कर खाते से 40000 रुपये साफ कर दिए। मोबाइल पर मैसेज आने पर जानकारी हुई। तो उन्होंने साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई।
ये मामले तो लखनऊ में साइबर जालसाजी के कुछेक उदाहरण हैं। राजधानी में ऐसे सैकड़ों लोग हैं, जिनसे साइबर जालसाज हर महीने लाखों रुपये की ठगी कर रहे हैं। पीड़ित बैंक से लेकर पुलिस के दरवाजे तक दस्तक देते हैं। लेकिन कुछ मामलों में ही रकम वापस उनके खाते में पहुंच पाती है। अब तक कोई ऐसा गिरोह पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा जो ओटीपी हासिल कर लोगों के खातों से रकम उड़ा रहा है। साइबर जालसाज लगातार लोगों के मोबाइल पर फोन कर खातों से संबंधित जानकारियां हासिल कर खाते से रकम साफ कर रहे हैं।