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पढ़िए, यूपी में 'सरकारी दामाद' बनाने का पूरा खेल!

Thu, 04 Dec 2014 01:53 PM IST
शैलेंद्र श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
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नोएडा हो या ग्रेटर नोएडा, देश की राजधानी से लगी इन स्थानों की जमीन पर फसल नहीं, सोना उगता है। शायद यही कारण है कि यहां मलाईदार पदों पर तैनाती में बड़ा ‘खेल’ होता है। पिछले कई वर्षों से सत्ता पीठ और ब्यूरोक्रेसी इस मलाई को मिलकर बांटते-खाते रहे हैं।
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लखनऊ में सत्ता चाहे जिसकी रही हो, कुछ अफसर इस काम को अंजाम तक पहुंचाने में महारत रखते हैं। यही वजह है कि उनकी कुर्सी को आम तौर पर कोई खतरा नहीं होता।

यादव सिंह प्रकरण इसकी ताजा मिसाल है, जब बसपा सरकार में मलाई काटने वाले यादव सिंह सपा सरकार की आंखों के भी तारे बन जाते हैं। देखा जाए तो पिछले दस वर्षों में नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना एक्सप्रेस वे अथॉरिटी में गिने-चुने अफसरों की ही तैनाती होती रही है।

अफसरों की गैरकानूनी हरकतों पर अदालत की अंगुली उठने के बावजूद इन्हें पंचम तल (सीएम कार्यालय) का संरक्षण कई सवाल खड़े करता है। सूबे की ब्यूरोक्रेसी भी मानती है कि नोएडा का कनेक्शन लखनऊ से मजबूती से जुड़ा है। सत्ता के करीबियों पर एक नजर...
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राकेश बहादुर लगा चुके हैं 4700 करोड़ का चूना!

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में तैनाती पाने वाले अफसरों के बारे में यह भी कहा जाता है कि वे सत्ता के संरक्षण में खुलकर ‘खेल’ करते हैं। प्लॉट आवंटन में धांधली हो या फिर इन्फ्रास्ट्रक्चर के कामों में करोड़ों रुपये का खेल, इन अफसरों के लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं। कोर्ट की लगातार फटकार के बावजूद नोएडा में तैनात रहे राकेश बहादुर को हटाने को लेकर हाल ही टाल-मटोल चलता रहा।

1979 बैच के आईएएस अफसर राकेश बहादुर फिलहाल प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री हैं। मुलायम सरकार में नोएडा अथॉरिटी में होटल प्लॉट आवंटन में हुए घोटाले से सरकार को 4700 करोड़ रुपये का चूना लगा।

इस मामले में मायावती सरकार ने राकेश बहादुर को सस्पेंड कर दिया था। सपा की सरकार बनने पर राकेश बहादुर को बहाल करके दुबारा नोएडा के चेयरमैन के पद पर तैनाती दे दी गई।

हाईकोर्ट की फटकार के बाद राकेश बहादुर को नोएडा से तो हटा दिया गया लेकिन फिर से वे शासन में प्राइम पोस्टिंग पाने में सफल रहे।

संजीव सरन ने ऐसे कराया मजबूत पकड़ का अहसास

संजीव सरन 1983 बैच के आईएएस अफसर हैं। मौजूदा समय वे प्रमुख सचिव औद्योगिक एवं अवस्थापना हैं। सरन बसपा सरकार में नोएडा अथॉरिटी में सीईओ थे। नोएडा होटल प्लॉट आवंटन घोटाले के आरोपों से घिरने के बाद इन्हें भी सस्पेंड कर दिया गया था।

अखिलेश सरकार ने उन्हें भी बहाल करके नोएडा का सीईओ बना दिया था। हाईकोर्ट के दबाव में इन्हें नोएडा से तो हटाया गया, लेकिन अखिलेश सरकार अधिक दिनों तक इन्हें किनारे नहीं रख सकी और महत्वपूर्ण तैनाती दे दी गई।

हाल ही संजीव सरन को प्रमुख सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास के पद से हटा दिया गया था लेकिन कुछ ही दिन में उन्होंने दोबारा उसी पद पर अपनी तैनाती कराकर सरकार पर अपनी मजबूत पकड़ का अहसास करा दिया।

मोहिंदर सिंह और रमा रमण भी रहे कृपापात्र

1987 बैच के आईएएस अफसर रमा रमण फिलहाल नोएडा व ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के सीईओ तथा यमुना एक्सप्रेस वे अथॉरिटी के चेयरमैन हैं। सूबे में सरकार बसपा की हो या सपा की, वे सभी के कृपापात्र रहे हैं।

सीधे तौर पर तो वे किसी मामले में आरोपित नहीं हुए हैं, लेकिन इनके कार्यकाल में नोएडा व ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी में जमकर घपले हुए।

आरोप लग रहा है कि भ्रष्टाचार के जरिये बेहिसाब संपत्ति अर्जित करने वाला यादव सिंह उन्हीं के संरक्षण में फला-फूला, लेकिन रमा रमण उसकी कारगुजारियों से पूरी तरह आंखें मूंदे रहे।

मोहिंदर सिंह 1978 बैच के रिटायर्ड आईएएस हैं। बसपा सरकार में उनकी तूती बोलती थी। सपा सरकार की भी उन पर खूब कृपा बरसी। मोहिंदर के नोएडा अथॉरिटी में चेयरमैन रहने के दौरान ही बहुचर्चित फार्म हाउस आवंटन घोटाला हुआ।

लोकायुक्त की लंबी जांच चली। सरकार ने उन्हें रिटायर होने का मौका दिया। लोकायुक्त की जांच के दायरे में आने के बाद भी उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई और वे बच निकले।
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हटाए जाते हैं बलविंदर जैसे ईमानदार अफसर

वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बलविंदर कुमार को ईमानदारी का खामयाजा भुगतना पड़ा था। वहीं राजीव कुमार द्वितीय 1983 बैच के आईएएस अफसर हैं। मौजूदा समय वे प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक जैसे महत्वपूर्ण पद पर तैनात हैं। राजीव माया सरकार में कृपापात्र रहे हैं।

नोएडा अथॉरिटी में डिप्टी सीईओ के पद पर रहते हुए भूखंड आवंटन में गड़बड़ी के आरोपों के कारण सीबीआई कोर्ट से तीन साल की कैद और जुर्माने की सजा होने के बाद उन्हें प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक पद से हटा दिया गया था।

लेकिन जमानत मिलने के बाद फिर अखिलेश सरकार ने उन्हें इसी विभाग की कमान थमा दी। राजीव की गिनती मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के चहेते अफसरों में होती है।

वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बलविंदर कुमार को नोएडा अथॉरिटी में सीईओ के पद पर उस समय तैनाती दी गई जब नोएडा किसानों के गुस्से से जल रहा था।

जमीन अधिग्रहण का मामला शांत कराने के बाद जैसे ही फार्म हाउस आवंटन घोटाले की लोकायुक्त जांच शुरू हुई, बलविंदर को हटाकर दुबारा मोहिंदर सिंह को सीईओ बना दिया गया। डर था कि कहीं बलविंदर सिंह फार्म हाउस घोटाले की फाइल न खोल दें।
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