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आखिर कैसे जिंदा जल गया सॉफ्टवेयर इंजीनियर!

Thu, 25 Dec 2014 08:47 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रायबरेली
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लखनऊ- इलाहबाद मार्ग पर हरचंदपुर थाना क्षेत्र में मंगलवार रात एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की जिंदा जलाकर हत्या कर दी गई । इंजीनियर का एक साथी भी घायल हुआ है। मौके पर उसकी बाइक भी जली पाई गई।
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पुलिस वाहन की टक्कर से बाइक में आग लगना बता रही है। इस पर मृतक के परिवारीजनों ने हंगामा किया और पुलिस से उनकी तीखी नोकझोंक हुई। लखनऊ के पीजीआई थाना क्षेत्र के रुचि खंड में मकान नंबर 2-292 निवासी आशीष द्विवेदी (25) पुत्र अशोक कुमार खुद की सॉफ्टवेयर कंपनी चलाता था।

उन्नाव जिले के मौरावां थाना क्षेत्र के अकोहरी निवासी मानवेंद्र सिंह (24) लखनऊ में विक्टोरिया लाइन आर्मी क्वार्टर में अपनी भाभी के साथ रहता है। मानवेंद्र बीटेक कर रहा है। बुधवार को तड़के लखनऊ-इलाहाबाद राजमार्ग पर हरचंदपुर कस्बे के पास आशीष जली अवस्था में मृत पाया गया, जबकि उसका साथी मानवेंद्र घायल था।
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इंजीनियर का शव इस कदर जला था कि उसका चेहरा पहचान में नहीं आ रहा था। साथ ही बाइक भी जल गई थी। पुलिस ने मानवेंद्र को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया है। अस्पताल पहुंचे परिवारीजनों ने आशीष के साथी पर ही हत्या का आरोप लगाया है। आशीष को जिंदा जलाकर मार डालने का आरोप लगाया।

घरवालों का कहना दोस्त ने ही मारा

मौसी आशा मिश्रा और अन्य परिवारीजनों का कहना था कि साथी ने ही उसे मारा है। परिवारीजनों ने पोस्टमार्टम कराने से भी इंकार कर दिया। इस दौरान परिवारीजनों ने हरचंदपुर एसओ राम अवतार को भी खूब खरीखोटी सुनाई। इससे जिला अस्पताल में अफरातफरी मच गई। बवाल बढ़ता देख कोतवाल ओपी यादव भी पहुंचे, लेकिन परिवारीजन शव का पीएम न कराने पर अड़े रहे।

एसओ हरचंदपुर का कहना है कि अज्ञात वाहन ने बाइक में टक्कर मार दी थी। इससे साथी दूर जा गिरा था, जबकि मृतक की बाइक वाहन में फंस गई थी। इससे वह काफी दूर तक घिसटता हुआ चला गया था। बाइक से पेट्रोल निकलने की वजह से आग लग गई और आशीष की जिंदा जलकर मौत हो गई। यदि परिवारीजन मामले में तहरीर देंगे तो हत्या की रिपोर्ट दर्ज करके जांच की जाएगी।

मृतक की मौसी आशा मिश्रा ने बताया कि दोस्त मानवेंद्र रात 10 बजे घर आया था। यह कहते हुए आशीष को घर ले गया था कि उसके घर में कोई नहीं है। इसलिए घर पर रुक जाओ। मानवेंद्र के भाई की मौत हो चुकी है, जबकि वह भाभी के साथ लखनऊ में रहता है।

कैसे पहुंच गया रायबरेली

भाभी के घर लेकर गया था तो फिर रायबरेली कैसे पहुंच गए। आशीष जिंदा जल गया, जबकि मानवेंद्र को हल्की चोट आई। साथ ही उसका मोबाइल, कंबल सब कुछ सुरक्षित है। मौसी ने बताया कि पहले आशीष दूसरी सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करता था।

उस कंपनी के मैनेजर ने आशीष से काम न छोड़ने की बात कही थी। बाद में उसने स्वयं की सॉफ्टवेयर कंपनी खोल ली। मौसी ने बताया कि मैनेजर ने भी आशीष को देख लेने की धमकी दी थी।

मृतक आशीष घर का इकलौता चिराग था। उसकी मौत से घर का चिराग बुझ गया है। पिता अशोक कुमार द्विवेदी सेना में सूबेदार हैं और इस समय कानपुर में उनकी तैनाती है।

आशीष की इकलौती बहन साक्षी है। जिला अस्पताल पहुंचे परिवारीजनों के आंसू नहीं थम रहे थे। उनमें घटना के प्रति नाराजगी थी तो अपने आशीष से बिछड़ने का गम साफ था।

गले नहीं उतर रही पुलिस की कहानी

सॉफ्टवेयर इंजीनियर आशीष द्विवेदी के जिंदा जलकर हुई मौत के मामले में पुलिस की कहानी किसी के गले नहीं उतर रही है। इसमें छेद ही छेद नजर आ रहे हैं, जिनके जवाब पुलिस के पास नहीं हैं। आमतौर पर किसी के घायल होने पर पुलिस उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराती है, लेकिन आशीष के दोस्त मानवेंद्र सिंह को एक नर्सिंगहोम में भर्ती कराया गया है।

यह हाल तब है, जब मृतक के साथी को हल्की चोटें ही आई हैं। वह सुरक्षित और उसका दोस्त जिंदा जल गया। यही नहीं मोबाइल, कंबल समेत अन्य सामान भी सुरक्षित है। पुलिस इन बिंदुओं पर जांच करने के बजाय मामले को सड़क हादसा बताकर दबाने की कोशिश कर रही है।

जिस तरह हरचंदपुर थाना क्षेत्र में लखनऊ निवासी एवं सॉफ्टवेयर इंजीनियर आशीष द्विवेदी की मौत हुई, उससे कई सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस का दावा कर रही है कि सड़क हादसे के दौरान बाइक सवार दोस्त मानवेंद्र बाहर गिर गया था, जबकि आशीष वाहन में ही फंस गया था।

पेट्रोल के गिरने से आग लग गई थी। सवाल उठता है कि मानवेंद्र को चोट कम आई थी। यदि आशीष जल रहा था तो मानवेंद्र ने उसे बचाने का प्रयास क्यों नहीं किया। जबकि उसे इतनी चोट नहीं थी कि वह आशीष को बचा न पाता।
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मानवेंद्र ने क्यों नहीं दी घरवालों को जानकारी

यही नहीं आशीष की मौसी का कहना था कि मानवेंद्र ने अपने घर में घटना की जानकारी दे दी, लेकिन उसके यहां फोन नहीं किया, जबकि घर का नंबर भी उसके पास था। जिस समय घटना हुई, उस समय भी मानवेंद्र ने पुलिस या आसपास के लोगों से भी घटना नहीं बताई।

पुलिस जब मौके पर पहुंची तो आशीष की जिंदा जलकर मौत हो चुकी थी। मानवेंद्र मोबाइल व कपड़े लिए था, जो सुरक्षित है। यही नहीं पुलिस रात्रि गश्त भी करती है। हरचंदपुर के पास घटना हुई तो फिर पुलिस को घटना की जानकारी क्यों नहीं हो पाई।

पुलिस इन बिंदुओं को जांच करने के बजाय मामले को सड़क हादसा बताकर दबाने की कोशिश कर रही है। जिला अस्पताल पहुंची मृतक की मौसी आशा मिश्रा ने भी पुलिस पर मामला दबाने का आरोप लगाया।

बावजूद पुलिस इस मामले को सड़क हादसा ही बता रही। ये ऐसे पहलू हैं, जिससे मामला संदिग्ध लग रहा है और पुलिस की कहानी किसी के गले नहीं उतर रही है।
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