पुलिस के मुताबिक, सरफराज ने कुबूल किया है कि वह तीनों की हत्या के बाद उनके खून से सने बिस्तर पर सात दिनों तक सोता रहा। वहीं भाई से ज्यादा नफरत करता था जिससे उसके शव को पहले ठिकाने लगाया और उसके बिस्तर को छत पर फेंक दिया। सरफराज ने बताया कि उसने सबसे पहले मां, फिर पिता और सबसे आखिर में भाई की हत्या की। इस दौरान अनिल भी उसका पूरा सहयोग करता रहा। भाई का शव ठिकाने लगाने केबाद उसने रात में बना हुआ मां के हाथ का खाना खाया। इसके बाद घर की सफाई की। जिस बिस्तर पर मां-पिता की हत्या की थी, उस चादर को हटाकर सो गया।
बहन रोती रही, भाई ने देखा तक नहीं
पुलिस के मुताबिक, शुरूआती पूछताछ में सरफराज पूरी बात हंसकर बता रहा था। उसने कहा कि तीनों की हत्या का उसे कोई अफसोस नहीं है। पुलिस ने उसके हत्या में प्रयुक्त बांका और बिस्तर को ठिकाने लगाने से पहले ही पकड़ लिया। वहीं विकासनगर स्थित घर जब बहन अनम पहुंची तो वह फूटकर रोने लगी। लेकिन सरफराज इतना क्रूर निकला कि वह उसका चेहरा तक नहीं देखना चाहता था। पुलिस ने विकासनगर स्थित घर से बांका और खून से सने तीन बिस्तर बरामद किए हैं।
जम्मू-कश्मीर के रामबन पुलिस ने दिया बेटी का नंबर
पुलिस के मुताबिक, आरोपी सरफराज ने मां, पिता व भाई के जम्मू-कश्मीर जाने की बात कही। वहां भूस्खलन में लापता होने की सूचना दी। बहन को बताया कि सभी वहां के रामबन से लापता हो गए हैं। इसकी जानकारी सरफराज ने रामबन पुलिस को दी थी। एसपी रामबन ने मामले की जानकारी बीकेटी पुलिस को दी। वहीं के पुलिस अधिकारी से सरफराज की बहन अनम का नंबर मिला, जिसके बाद बीकेटी पुलिस विकासनगर में पहुंची। तब सरफराज पकड़ में आया।
सीओ बीकेटी नवीना शुक्ला के मुताबिक, सरफराज ने अपनी मां, पिता व भाई की हत्या के लिए बैकुंठधाम के सफाई कर्मचारी अनिल यादव को सुपारी दी थी। इसके लिए एक लाख 80 हजार रुपये दिये थे। दोनों ने मिलकर वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने घर की छत से खून से सने गद्दे व बांका बरामद कर लिया है। बुधवार को पुलिस ने वारदात स्थल विकासनगर स्थित आवास का निरीक्षण किया। वहां पहुंचने के बाद सरफराज रोने लगा। उसने कुबूला कि लोगों को संदेह न हो इसके लिए कश्मीर जाने की झूठी कहानी रची थी।
बहन के निकाह की सूचना के बाद ही रची थी साजिश
सीओ नवीना शुक्ला के मुताबिक, सरफराज ने पुलिस को बताया कि उसका परिवार उसको पसंद नहीं करता था। इसकी वजह से वह चार-पांच सालों से कोलकाता और बंगलूरू में रह रहा था। घर वाले छोटे भाई के आगे उसकी एक भी नहीं चलने देते थे। इसी बीच अगस्त में बहन के निकाह की जानकारी होने पर सरफराज ने परिवारीजनों की हत्या की साजिश रच डाली। इसके बाद उसने ठाकुरगंज के मोहिनीपुरवा निवासी अनिल यादव से संपर्क किया। बहन के निकाह में शामिल होने के लिए 27 नवंबर 2021 को लखनऊ पहुंचा। इसके बाद घर पर ही रुक गया। मौका मिलते ही पांच जनवरी को वारदात को अंजाम दे दिया।
घर पर नहीं के बराबर था आना-जाना
सरफराज के मौसा सलीम के मुताबिक, सरफराज शुरू से ही पढ़ाई में ठीक था। अच्छे नंबरों से पास होता था। उसकी पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय अलीगंज में हुई थी। इसके बाद उसने लखनऊ विश्वविद्यालय से एमकॉम किया। फिर विधि से स्नातक की डिग्री हासिल की। साथ ही सीए न कर पाने पर आईसीडब्ल्यूए का कोर्स किया। वह न्यायिक सेवा में जाने की तैयारी कर रहा था। इसी दौरान एक लड़की के संपर्क में आकर घर से दूर हो गया। कोलकाता जाने के बाद से ही वह पूरे परिवार को ही खुद के खिलाफ समझने लगा। परिवारीजन ने उसे बेटी अनम के निकाह में बुलाया था।
कोविड संक्रमित होने की बात कह रिश्तेदारों को किया दूर
सरफराज ने हत्या की कहानी पूरी तरह से फिल्मी अंदाज में लिखी थी। उसे पता था कि वह पकड़ा नहीं जाएगा। लोग उस पर संदेह न करें, इसके लिए परिवारीजनों के कश्मीर जाने की कहानी बनाई। साथ ही लोग घर न आएं इसके लिए खुद को कोविड संक्रमित बताया। उसने खुद 13 जनवरी को जम्मू की फ्लाइट पकड़ी। वहीं से बहन अनम को छोटे भाई शावेज के मोबाइल से कश्मीर में फंसे होने की सूचना दी, ताकि लोगों को यकीन हो जाए कि पूरा परिवार कश्मीर में है।