मड़ियांव क्षेत्र से कक्षा तीन की छात्रा को मां से मिलाने का झांसा देकर पड़ोसी महिला व उसकी बेटी ने अगवा कर लिया।
बीस दिन तक लापता छात्रा को आरोपी मां-बेटी सीतापुर व लखीमपुर सहित कई जिलों में परिचितों के घर ले जाकर बंधक बना रखे रहीं।
पीड़ित के घरवाले बेटी की तलाश में भटकते रहे। कोई सुराग न मिलने पर दो दिन पहले उसकी गुमशुदगी लिखवाई। बुधवार देर शाम मासूम का 35 हजार रुपये में सौदा तय होने के बाद उसको बेचने पहुंची मां-बेटी को गाजीपुर पुलिस ने दबोच लिया।
मड़ियांव पुलिस की टीम बच्ची को लेकर थाने आ गई। पुलिस ने आरोपी मां-बेटी को जेल भेज दिया है। मड़ियांव क्षेत्र निवासी अरविंद की बेटी रीना (11) (सभी परिवर्तित नाम) प्राथमिक विद्यालय में कक्षा तीन की छात्रा था।
छात्रा के मां की तबीयत खराब होने पर वह मायके गई थी। घर पर पिता व बेटी थी। 8 जनवरी को पिता रिक्शा चलाने गया था।
इस बीच पड़ोसी महिला रामदेवी व उसकी मां राजेश्वरी अवस्थी ने मासूम को मां से मिलाने का झांसा दिया और उसे सीतापुर लेकर चली गई।
घर पहुंचने पर बेटी के न मिलने पर पिता ने उसकी तलाश शुरू की, मगर कोई सुराग नहीं मिला। माता-पिता खुद ही उसकी तलाश करते रहे। आखिर 20 जनवरी को उन्होंने मड़ियांव थाने में बेटी की गुमशुदगी लिखवाई।
जानकारी के मुताबिक, मां-बेटी छात्रा को लेकर पहले दिन सीतापुर ले गई। जहां उसे एक कमरे में बंधकर बना रखा। छात्रा के रोने पर उसकी पिटाई की। आरोपी महिलाएं उसे सीतापुर के तंबौर में रिश्तेदार के घर लेकर गए।
यहां कुछ दिन रखने के बाद उसे लखीमपुर ले गए। जहां से आरोपी मां-बेटी छात्रा का सौदा करने के लिए लखनऊ आ गईं। यहां गाजीपुर क्षेत्र में छात्रा का सौदा तय किया जा रहा था।
सूचना पर गाजीपुर थाने के एसएसआई राम राज कुशवाहा व उनकी टीम ने आरोपी महिलाओं को दबोच कर छात्रा को रिहा कराया। पुलिस ने छात्रा का मेडिकल कराने के लिए डफरिन अस्पताल भेजा।
इंस्पेक्टर रघुवीर सिंह ने बताया कि आरोपी मां-बेटी बच्ची की तस्करी की कोशिश कर रही थीं। वहीं, बेटी के लापता होने के बाद पीड़ित परिवार में तीन दिन तक चूल्हा नहीं जला।