शुरुआती जांच में सामने आया कि निजी कंपनी ने एलडीए के सर्वर पर मौजूद डाटा का अवैध तरीके से लोगों को फायदा पहुंचाने में इस्तेमाल किया। इसमें एलडीए के कंप्यूटर सेक्शन के अधिकारी, कर्मचारी भी शामिल थे। एसीपी साइबर सेल से आगे जांच करने को कहा गया। कर्मचारियों ने सर्वर का दुरुपयोग कर मूल आवंटियों के नाम बदलकर फर्जी नामों से दस्तावेज तैयार किए। इससे प्राधिकरण को करोड़ों का नुकसान हुआ और उसकी छवि भी खराब हुई।
जानकीपुरम योजना को भी पीछे छोड़ा
एलडीए में सबसे बड़ा भूखंड आवंटन में घोटाला जानकीपुरम योजना में हुआ था। सीबीआई जांच में 413 भूखंड की फाइलें एलडीए से गायब मिलीं, जबकि 139 में ही गड़बड़ी पकड़ी जा सकी। वहीं, इस प्रकरण में आंकड़ा 498 पहुंच चुका है। इसके बाद भी कूड़े से लेकर बंद अलमारियों तक में गायब फाइलें मिल रही हैं।
मुख्य आरोपी हो चुके सेवानिवृत्त
प्रकरण में एलडीए के मुख्य आरोप एसबी भटनागर अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। प्राधिकरण ने उन्हें चार्जशीट दी। यह जांच भी अधूरी है। सेवानिवृत्ति के बाद के उनके भुगतान एलडीए ने रोके हैं।
एलडीए सचिव पवन गंगवार का कहना है कि एलडीए की विभागीय जांच पूरी हो चुकी है। एफआईआर भी कराई जा चुकी है। पुलिस से लगातार बातचीत कर विधिक कार्रवाई के लिए कहा जा रहा है। एलडीए के सर्वर में एंट्री के समय आईपी एड्रेस सुरक्षित किए जाने जैसे कदम उठाए गए हैं, जिससे आगे फर्जीवाड़ा न हो।
पूरे रिकॉर्ड आज तक नहीं मिले
लखनऊ पुलिस के जांच अधिकारी उमेश सिंह का कहना है कि एलडीए से जांच पूरी करने के लिए कुछ रिकॉर्ड मांगे गए थे, जो अभी तक उपलब्ध नहीं कराए गए। जब तक रिकॉर्ड नहीं मिलेंगे, पुलिस जांच कैसे पूरी कर सकती है।
सर्वर की फॉरेंसिंक जांच जरूरी
एसीपी साइबर क्राइम विवेक रंजन का कहना है कि एलडीए के साथ शुरुआती जांच पूरी हो चुकी है। जो तथ्य सामने आए हैं उनकी सच्चाई के प्रमाणन के लिए सर्वर की फॉरेंसिक जांच होना जरूरी है। यह शुरू कराने के लिए कार्रवाई की जा रही है। फॉरेंसिक जांच में सभी दोषी सामने आ जाएंगे।