फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फीस के लिए किया जलील तो गरीब की बेटी ने दी जान

Wed, 21 Jan 2015 07:01 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
राजधानी के काकोरी इलाके में फीस न चुका पाने से मजबूर किसान गणेश की बेटी लक्ष्मी ने कीटनाशक पीकर जान दे दी।
विज्ञापन

लक्ष्मी गांव के ही एक निजी स्कूल में 11वीं की छात्रा थी। आर्थिक तंगी के चलते पिता बीते तीन महीने से उसकी फीस नहीं दे पा रहा था जबकि लक्ष्मी पढ़ना चाहती थी। स्कूल में फीस के लिए उसे रोजाना जलील किया जा रहा था।

मौंदा गांव निवासी रमाकांत ने बताया कि उसकी छोटी बहन लक्ष्मी (17) पढ़ाई में होशियार थी। वह नियम से स्कूल जाती थी। कहती थी कि पढ़-लिखकर पूरे परिवार का सहारा बनेगी। लेकिन आर्थिक तंगी ने लक्ष्मी को हमेशा के लिए छीन लिया।
विज्ञापन


बकौल रमाकांत, पिता बटाई पर जमीन लेकर खेती करते हैं। इस बार फसल अच्छी नहीं हुई जिससे पूरे परिवार का आर्थिक ताना-बाना बिगड़ गया।

उसने बताया कि पिता बीते तीन महीने से लक्ष्मी के स्कूल की फीस नहीं चुका पा रहे थे। ऐसे में लक्ष्मी का स्कूल जाना बंद हो गया।

मजबूर पिता नहीं कर सका फीस का इंतजाम

पढ़ाई छूटने से भविष्य को लेकर चिंतित लक्ष्मी ने कई बार पिता से फीस जमा करने को कहा। हालांकि, वह चाहकर भी रुपये की व्यवस्था नहीं कर पा रहे थे।

लक्ष्मी ने सोमवार को एक बार फिर पिता से फीस के लिए कहा ताकि वह स्कूल जा सके लेकिन कोई व्यवस्था न होने से झुंझलाए गणेश ने बेटी को फटकार दिया।

इससे क्षुब्ध छात्रा ने घर में रखा कीटनाशक पी लिया। तबीयत खराब होने पर परिवार को इसका पता चला और गंभीर हालत में उसे लेकर ट्रॉमा सेंटर पहुंचे।

इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बेटी की मौत पर रो रहा पिता बस एक ही बात कहे जा रहा था कि काश, मैं फीस का इंतजाम कर सकता।
विज्ञापन

स्कूल में रोज अपमानित होती थी लक्ष्मी

रमाकांत का कहना है कि लक्ष्मी को स्कूल में रोज फीस के लिए टोका जाता था। वह घर आकर पिता से कहती। फीस मांगती।

लेकिन वह भी मजबूर थे। इस बार फसल ने भी धोखा दे दिया। रमाकांत ने कहा कि कलेजा फट जाता था जब बहन को फीस के लिए रोते देखता था।

वह कहती थी कि रोज प्रार्थना सभा में ही उसे लाइन से निकालकर बाहर खड़ा कर दिया जाता था। बाकी बच्चे क्लास में भेज दिए जाते थे।

वह क्लास रूम से आती हुई बच्चों की पढ़ाई की आवाजें सुनतीं और मन मसोस कर रह जाती। वह आते-जाते टीचर्स की तरफ उम्मीद भरी निगाहों से देखती लेकिन किसी को उसकी हालत पर दया नहीं आती थी।

तीन-तीन घंटे बाद टीचर उससे बात करते और फीस लेकर आने की बात कहते हुए वापस घर भेज देते। रमाकांत ने कहा कि लक्ष्मी इससे बहुत अपमानित महसूस करती थी। शायद इसी वजह से उसे आत्महत्या का खयाल आ गया हो।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें