लखनऊ में लोगों को ऑन लाइन हॉली डे का विशेष पैकेज देकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश बुधवार को साइबर सेल ने किया। इस गिरोह को जीजा-साले मिलकर चला रहे थे।
पुलिस के हत्थे चार जालसाज चढ़े। पुलिस ने इनके पास से ढाई सौ प्री एक्टीवेटेड सिम और अन्य दस्तावेज बरामद किए। गिरोह गोमतीनगर और इंदिरानगर में फर्जी कॉल सेंटर चला रहा था।
अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी सर्वेश कुमार मिश्र ने बताया कि मऊ निवासी अभिषेक पाल और अरुण पाल गिरोह चला रहे थे। दोनों रिश्ते में जीजा-साले हैं। इनके अलावा केरल का शशांक नायर और कानपुर का रीतेश श्रीवास्तव पकड़ा गया।
जालसाजों के पास से पुलिस ने एक लैपटॉप, 15 मोबाइल, 243 फर्जी नाम व पते पर खरीदे गए प्री एक्टीवेटेड सिमकार्ड, दो डायरी व रजिस्टर, जिसमें लोगों के नाम, पते, मोबाइल नंबर की सूची दर्ज है। इसके अलावा कार, बाइक और एक स्कूटी बरामद की है।
सैकड़ों को लगाया चूना
गिरफ्त में आए जालसाज
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस के मुताबिक, जालसाज लोगों को दो रात व तीन दिन का हॉली डे पैकेज का ऑफर देते थे। इसके बदले 20 से 50 हजार रुपये तक ठग लेते थे। पुलिस के मुताबिक, अब तक गिरोह दो सौ से अधिक लोगों को निशाना बना चुका है।
यह गिरोह किराए के मकान में विभूतिखंड के कठौता झील और इंदिरानगर आरएलबी कॉलेज के पास कॉल सेंटर बनाकर लोगों को अपने जाल में फंसाता था। इस काम के लिए हर सेंटर पर पांच-पांच महिलाएं काम करती थीं।
इनको एक ग्राहक फंसाने के बाद उनसे एटीएम और क्रेडिट कार्ड के ओटीपी भी हासिल कर आॅनलाइन खरीद-फरोख्त करते थे। जालसाजों ने राजधानी में दो काॅल सेंटर बना रखे हैं। इनकी वेबसाइट का नाम आॅन लाइन शॉपिंग डॉट कॉम है।
पुलिस ने बताया कि जालसाजों को पब्लिक का मोबाइल नंबर और डेटा इलाहाबाद से आता था। जीजा-साले का एक करीबी रिश्तेदार भी इसमें शामिल हैं। ठगी के लिए प्रयुक्त होने वाला सिम इलाहाबाद के शहरी और ग्रामीण इलाकों के दुकानदार उपलब्ध कराते थे। हर सिम के बदले मोटी रकम अदा की जाती थी।
दुकानदारों को रकम की वैल्यू भेज नकदी हासिल करते
पुलिस की गिरफ्त में आए जालसाज
- फोटो : अमर उजाला
साइबर सेल प्रभारी निरीक्षक विजय वीर सिंह सिरोही ने बताया कि जालसाजों ने एक वेबसाइट बना रखी थी। जिसका नाम ऑन लाइन शॉपिंग बाजार डॉट कॉम दे रखा था। इसके जरिए लोगों को ऑफर देकर रकम भी ऑन लाइन हासिल करते थे।
जिसे पेटीएम के जरिए अपने कुछ खास दुकानदारों के पास वैल्यू ट्रांसफर करते थे। दुकानदार इस वैल्यू के बदले कुछ कमीशन रखकर नकदी जालसाजों के कलेक्शन एजेंट को दे देते थे।
जालसाजों ने कुबूला कि यह गिरोह एक साल से अधिक समय से चल रहा था। वह प्रतिदिन ढाई से तीन लाख रुपये एंठ लेत थे। अब तक जालसाज करीब 20 करोड़ तक की ठगी कर चुके हैं।
देशी व विदेशी सैलानियों को झांसे में फंसाने के लिए अंग्रेजी बोलने में एक्सपर्ट केरल के शशांक नायर को मोटी कमाई का लालच देकर शामिल किया। जालसाजों ने कुबूला कि उनके निशाने पर लखनऊ ही नहीं यूपी के बाहर लोग ही होते थे।