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निवेशकों के करोड़ों हड़पने की तैयारी में है एक और कंपनी!

Mon, 23 Dec 2013 02:00 AM IST
संजय त्रिपाठी/लखनऊ
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विभूति खंड क्षेत्र में निवेशकों को करोड़ों का चूना लगाने वाली टिस्का होल्डिंग कंपनी की तर्ज पर गोमतीनगर क्षेत्र में एक और कंपनी चल रही है।
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घर बैठे 12 से 17 प्रतिशत तक मुनाफे के वायदे पर सैकड़ों लोग मोटा निवेश कर रहे हैं।

जालसाजी के आरोप में गिरफ्तार टिस्का के एमडी से पूछताछ में यह खुलासा हुआ था। बावजूद इसके पुलिस ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है।

निवेशकों से करोड़ों की जालसाजी के आरोप में वकीलों द्वारा पकड़कर पुलिस को सौंपे गए टिस्का होल्डिंग कंपनी के एमडी राजेश राठौर ने पूछताछ में एक और कंपनी का नाम उजागर किया था।

राजेश ने कुबूला था कि उसकी कंपनी ने जमीन की खरीद फरोख्त व सोने-चांदी के व्यवसाय में निवेश पर हर महीने छह से 15 प्रतिशत तक कमीशन देने का वादा किया था।

जबकि गोमतीनगर क्षेत्र में संचालित एक कंपनी द्वारा निवेशकों को हर महीने 12 से 17 प्रतिशत तक मुनाफे का झांसा दिया जा रहा है।

लुभावनी योजनाओं के झांसे में आए बड़ी संख्या में लोग लाखों का निवेश कर रहे हैं। करोड़ों की जालसाजी के आरोपी के इस बयान पर विभूति खंड पुलिस ने उच्चाधिकारियों को जानकारी दी।
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राजेश राठौर द्वारा बताई कंपनी का ब्योरा खंगाला गया। इंटरनेट पर उसकी लुभावनी योजनाओं की लंबी फेहरिस्त नजर आई।

कंपनी के आलीशान ऑफिस में अनेक कर्मचारी कार्यरत हैं और एजेंटों की फौज लोगों को निवेश के लिए प्रेरित कर रही हैं।

कंपनी के बारे में तमाम जानकारी जुटाने के बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है। जबकि दिन ब दिन लोग इनके जाल में फंसते जा रहे हैं।

अब तक 63
विभूति खंड पुलिस ने टिस्का होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ 10.75 लाख रुपये हड़पने का एक और मुकदमा दर्ज किया है। इसके साथ टिस्का पर मुकदमों की संख्या बढ़कर 63 हो गई है।

पुलिस ने बताया कि चिनहट निवासी सुधीर कुमार सिंह ने टिस्का होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड के एमडी राजेश राठौर व अन्य निदेशकों पर 10.75 लाख रुपये हड़पने का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट लिखाई है।
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एक निजी कंपनी में वाहन चालक सुधीर का कहना है कि टिस्का कंपनी की लुभावनी योजनाओं के झांसे में आकर उसने निवेश किया था।

हर महीने घर बैठे मोटे कमीशन का वादा करने वाले निदेशकों ने वक्त बीतने के साथ टालमटोल शुरू कर दी। कई बार तगादा किया।

इस बीच निदेशकों के मोबाइल बंद हो गए और कंपनी के ऑफिस पर ताला लटक गया। एमडी राजेश राठौर की गिरफ्तारी व अन्य निदेशकों के फरार होने की सूचना मिली। इस पर वह कंपनी से छुट्टी लेकर लखनऊ लौटा और रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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