बताया जा रहा है कि 19 अप्रैल को तरबगंज के घांचा बीकापुर में पंचायत चुनाव में मतदान के दौरान हुई हिंसा के कारण जेल में निरुद्ध किए गए राजदत्त पांडेय पुत्र अम्बिका प्रसाद पांडेय की 10 मई को जेल में ही मृत्यु हो गई थी। जिसके बाद जेल पुलिस ने शव को जिला चिकित्सालय भेज दिया। जो कुछ देर तक अस्पताल के गेट पर ही पड़ा रहा। जिसके बाद उस शव को मर्चरी की फर्श पर फेंक दिया गया।
बंदी के परिजनों को रात 10 बजे सूचना मिली तो उन्होंने नगर कोतवाल और जिलाधिकारी को सूचित कर दिया। गंभीर बात यह है कि मृतक के परिजनों को न तो जेल प्रशासन ने और न ही जिला अस्पताल प्रशासन ने सूचना दी।
मृतक के पुत्र अंकित पांडेय ने बताया कि हमारे परिवार को उनकी बीमारी के बारे में सूचना नहीं दी गई। दो बार जेल में मुलाकात करने गया तो मिलने नहीं दिया गया।