दरअसल प्रदेश का डीजीपी कौन होगा यह केंद्र सरकार का पैनल तय करता है। इसके लिए अधिकारी का 30 साल का रिकॉर्ड देखा जाता है। उसके बाद तीन नाम तय कर प्रदेश को भेजा जाता है, जिसमें मुख्यमंत्री तय करते हैं कि डीजीपी इन तीन में से कौन होगा।
सरकार के पास कार्यवाहक डीजीपी बनाने का अधिकार
प्रदेश सरकार कार्यवाहक डीजीपी भी बना सकती है। सुलखान सिंह के रिटायरमेंट के बाद आनंद कुमार 22 दिन तक कार्यवाहक डीजीपी रहे हैं। इसी तरह ओपी सिंह के रिटायरमेंट के बाद एचसी अवस्थी को पहले कार्यवाहक डीजीपी बनाया गया था, बाद में पूर्ण कालिक डीजीपी बनाया गया था।