फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लखनऊः कर निर्धारण में खेल कर रहे नगर निगम कर्मचारी, खजाने को लग रही चपत

Wed, 13 Nov 2019 03:05 PM IST
ishwar ashish प्रवेंद्र गुप्ता/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
विज्ञापन

लखनऊ में एक ओर नगर निगम पर 300 करोड़ की देनदारी का बोझ है, वहीं उसके कर्मचारी हाउस टैक्स निर्धारण में खेल कर खजाने को और खाली कर अपनी जेबें भर रहे हैं। भ्रष्टाचार का नया मामला इंदिरानगर क्षेत्र में सामने आया है, जिसमें व्यावसायिक इमारत पर आवासीय टैक्स लगाया गया था।

विज्ञापन


इस गड़बड़ी को लेकर अब कर अधीक्षक को नोटिस जारी किया गया है। एक पेट्रोल पंप के टैक्स निर्धारण में भी गड़बड़ी पकड़ी गई है। बहरहाल, नगर आयुक्त दोषियों पर सख्त कार्रवाई की बात कह रहे हैं। कर्मचारियों के ‘खेल’ के चलते जिन व्यावसायिक संपत्तियों से नगर निगम को कई लाख रुपये टैक्स मिलते, उनसे आवासीय में महज हजारों में कर लिया जा रहा है।

बाकी रकम नगर निगम के कर्मचारी, अधिकारी अपने जेबों में भर रहे हैं। विभागीय जांच में सामने आया ताजा मामला नगर निगम के जोन सात में आने वाले बाबू जगजीवन राम वार्ड के इंदिरानगर सेक्टर-14 का है। यहां तीन भवनों पर टैक्स निर्धारण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार पकड़ा गया है। इसके बाद कर अधीक्षक को नोटिस जारी किया गया है।
विज्ञापन


क्षेत्रफल भी कर कर दियाः अपने फायदे के लिए कर्मचारियों ने कई मंजिला हॉस्पिटल, कॉम्प्लेक्स और रेस्टोरेंट का टैक्स आवासीय कर दिया। इतना ही नहीं इनका क्षेत्रफल भी कम दिखाया है। इससे नगर निगम के खजाने को दोहरी चोट लग रही है।

पांच गुना तक लगना चाहिए था कर

जांच में सामने आया कि इंदिरानगर सेक्टर-14 में भवन संख्या 15 की जगह चार मंजिला हॉस्पिटल है। भवन संख्या 14/09 की जगह पांच मंजिला कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स है और भवन संख्या 14/01 की जगह तीन मंजिला रेस्टोरेंट है। नगर निगम अधिनियम के तहत इन पर व्यावसायिक कर (आवासीय का पांच गुना तक) लगना चाहिए, पर नगर निगम में इनका आवासीय कर ही जमा हो रहा है।

दस साल से चल रहा पेट्रोल पंप, अब लगाया टैक्स
शंकरपुरवा द्वितीय वार्ड के गन्ने का पुरवा में रेम्बो फिलिंग सेंटर दस साल पुराना है। यह पेट्रोल पंप मेन रोड पर है, इसके बाद भी नगर निगम के कर निरीक्षकों ने इसका कर निर्धारण ही नहीं किया था। अब 2019 में टैक्स निर्धारण हुआ तो उसमें भी नियमों की अनदेखी की है।
विज्ञापन

जांच हो तो सामने आएंगे सैकड़ों मामले

जानकार बताते हैं कि ये तीन मामले तो बानगी भर हैं। अन्य जोनों में भी कॉमर्शियल बिल्डिंग को आवासीय में दर्ज किया गया है। जानकार तो यहां तक बताते हैं कि बहुत सी बड़ी कॉमर्शियल बिल्डिंगों पर तो टैक्स ही नहीं निर्धारित किया गया है। करीब 30 प्रतिशत संपत्तियां कर से छूटी हैं। यह मामला कई बार सदन और कार्यकारिणी में उठा, फिर भी धांधली जारी है।

इसीलिए नहीं शुरू हो रहा ऑनलाइन टैक्स असेसमेंट
वर्ष 2002 में स्वकर निर्धारण प्रणाली लागू हुई थी, लेकिन कर्मचारी इसमें अड़ंगा लगाए हैं। कहने को तो यह स्वकर प्रणाली है, पर कोई व्यक्ति यदि खुद गणना कर टैक्स जमा करना चाहे तो ऐसा नहीं होता। इतना नहीं कई सालों से ऑनलाइन असेसमेंट की बात हो रही है, पर इसे लागू नहीं किया जा रहा है। कमाई के चक्कर में कर्मचारी ऑनलाइन म्यूटेशन भी लागू नहीं होने दे रहे हैं, जबकि सॉफ्टवेयर तैयार हो चुका है।

जांच कर करेंगे दोषियों पर कार्रवाई
जो कर्मचारी-अधिकारी टैक्स के घपले में दोषी होंगे, उन्हें निलंबित किया जाएगा। कॉमर्शियल को आवासीय में दर्ज करना गंभीर मामला है। इसके लिए जो भी जिम्मेदार हैं उन पर कार्रवाई होगी। - इंद्रमणि त्रिपाठी, नगर आयुक्त
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें