थाने में आप अपनी शिकायत लेकर जाएं और शिकायत सुनने से पहले पुलिस वाले आपको सम्मान के साथ बैठने को कहें, मीठा खिलाकर पानी पिलाएं और पूछें कि बताइए मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूं तो आपको कैसा लगेगा? शायद आप कहें कि यह कहां संभव है।
पुलिस वाले कब किसी को इज्जत देते हैं और कुछ खिलाते पिलाते हैं। लेकिन ऐसा हो रहा है यूपी के पीलीभीत जिले में। वहां के एसपी देव रंजन वर्मा ने यह अच्छी पहल की है जिसकी सराहना राजधानी लखनऊ में भी हो रही है। पुलिस और गृह विभाग के लोग भी इसकी तारीफ कर रहे हैं।
दरअसल, वर्मा की यह पहल पुलिस को पब्लिक फ्रेंडली बनाने की है। जब कोई पीड़ित थाने में अपनी शिकायत लेकर आए तो पहले उसे गुड़ व चना खिलाकर ठंडा पानी पिलाया जाए और फिर उसका प्रार्थनापत्र लेकर पीले रंग की पर्ची के रूप में प्राप्ति रसीद दी जाए।
इसके लिए हर थाने में वहीं के स्टाफ से दो लोगों को जन शिकायत अधिकारी बनाया गया है। ये थाने पर आने वाली शिकायतों को सुनेंगे। इसके बाद पावती के रूप में पीले रंग की पर्ची दी जाएगी। सीओ के यहां हरे रंग की रसीद और अपर पुलिस अधीक्षक के यहां शिकायत मिलने के बाद सफेद पर्ची दी जाएगी।
13 मई से शुरू हुई इस पहल के तहत अब तक पीलीभीत के 15 थानों से 654 शिकायतें आईं जिसके बदले पीली पर्चियां दी गई हैं। सीओ के दफ्तर में आई शिकायतों के बदले 27 हरी पर्चियां और पुलिस अधीक्षक व अपर पुलिस अधीक्षक के यहां आई शिकायतों के बदले 7 सफेद पर्चियां पिछले एक सप्ताह में दी गई हैं।
वाट्स एप पर दी जा रही अपराधियों की जन्म कुंडली
डेमो
रंजन वर्मा ने थाना दिवस के लिए भी अलग से व्यवस्था करते हुए अधिक से अधिक शिकायतों का समाधान करने के लिए दोनों पक्षों को नोटिस भेजकर थाने बुलवाना और संबंधित के साथ मौके पर पहुंच कर फैसला आन स्पॉट करने की पहल की। इसका भी लोगों को काफी फायदा हो रहा है।
बीट सिस्टम को व्यवस्थित करते हुए सभी 104 पुलिस चौकियों और हल्कों के लिए चौकी इंचार्ज या हल्का इंचार्ज के नेतृत्व में सिपाही व लेखपाल की एक टीम गठित की गई है।
इस टीम के इंचार्ज को भी सीयूजी नंबर दिया गया है। अभी तक सिर्फ थाना स्तर पर सीयूजी नंबर दिया जाता है। पारिवारिक झगड़े निपटाने के लिए चार परामर्श केंद्र भी खोले जा रहे हैं।
जेल से छूटे शातिर अपराधियों की निगरानी के लिए एक डाटाबेस तैयार किया गया है। इस पर 51 बिंदुओं पर सूचनाएं अपडेट की जा रही हैं। सभी चौकी इंचार्ज, हल्का इंचार्ज, एसओ, एसएचओ व सीओ को मिलाकर एक वाट्स एप ग्रुप बनाया गया है। इस ग्रुप पर अपराधियों की फोटो, वीडियो और डोजियर उपलब्ध कराया जा रहा है।
लखनऊ में डीआईजी रहे नवनीत सिकेरा ने भी इसी तरह की पहल शुरू की थी, जो पूरे लखनऊ रेंज में लागू की गई थी। लेकिन उनके हटते ही पूरा सिस्टम पुराने ढर्रे पर लौट आया। अब पीलीभीत पुलिस ने यह व्यवस्था शुरू की है।