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लखनऊ विश्वविद्यालय का 62वां दीक्षांत समारोह सम्पन्न, दुर्गेश कुमार को मिला चांसलर मेडल

Tue, 15 Oct 2019 07:09 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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दीक्षांत समारोह की एक तस्वीर। - फोटो : amar ujala
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देश ने एक साथ सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक बदलाव का एक मुश्किल रास्ता चुना है। इस रास्ते पर सफलतापूर्व चलकर ही देश का विकास होगा। इसके लिए हमें जन आंदोलन खड़ा करना होगा। तभी हम विकास के लक्ष्य को पूरा कर पाएंगे। नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने मंगलवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के 62वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर विद्यार्थियों को यह सीख दी। 

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उन्होंने युवाओं से अपेक्षा की कि वे इस आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाएं। विवि के दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को 192 पदक और 40 हजार 35 डिग्री दी गईं। समारोह में डॉ. राजीव कुमार तथा मिशन चंद्रयान-2 की निदेशक डॉ. रितु करिधल श्रीवास्तव को मानद उपाधि भी प्रदान की गई।

डॉ. राजीव कुमार ने कहा कि इस समय पूरे विश्व की नजर भारत पर है। इसलिए हमें भी पूरे विश्व पर अपनी नजर रखनी होगी। आज हमारी योजनाओं- जनधन, जीएसटी और आयुष्मान जैसी योजनाएं पूरे विश्व में चर्चा का विषय हैं। भारत एक बड़ी अर्थव्यस्था है। इसमें सभी को मिलकर काम करना होगा। सब लोग जुडेंगे तभी यह देश विकास के पथ पर अग्रसर होगा। 
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62वें दीक्षांत समारोह की खासियत मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि और मानद उपाधि प्राप्त करने वाली विभूतियों का लविवि का पूर्व विद्यार्थी होना भी रहा। दीक्षांत समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उप-मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. दिनेश शर्मा भी उपस्थित रहे। राज्यपाल और लविवि की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने समारोह की अध्यक्षता की। लविवि कुलपति प्रो.एसपी सिंह ने सभी को धन्यवाद दिया तथा लविवि की रिपोर्ट पेश की।

पथ भ्रष्ट होकर आया था, लविवि ने दी थी पनाह

मुख्य अतिथि डॉ. राजीव कुमार ने कहा कि वे लखनऊ विश्वविद्यालय के हमेशा एहसानमंद रहेंगे। वर्ष 1971 में पथभ्रष्ट होकर मैं यहां आया था। तब लविवि ने पनाह दी थी। इसके बाद यहां से स्नातक, परास्नातक और पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आज मुख्य अतिथि के रूप में दीक्षांत समारोह में शामिल होकर और मानद उपाधि प्राप्त करने के बाद एक बार फिर से लविवि के एहसानमंद हो गये हैं।

सार्वजनिक किये जाएं सभी विश्वविद्यालयों के नैक के स्कोर
मुख्य अतिथि ने एक तरफ लविवि की तारीफ की तो दूसरी तरफ नैक के मूल्यांकन में बी ग्रेड से ऊपर उठने की नसीहत भी दी। उन्होंने कहा कि कई विवि का नैक स्कोर तीन से ऊपर रहा। लविवि से इससे नीचे था। इसे उठाने के लिए लविवि को प्रयास करना चाहिए। उन्होंने राज्यपाल को सुझाव दिया कि सभी राज्य विश्वविद्यालयों का नैक स्कोर वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाये। इससे विवि की गुणवत्ता का पता चलेगा तथा सर्वश्रेष्ठ चार या पांच विश्वविद्यालय चुनने में भी आसानी होगी।
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इनको मिले मेडल

  • सामिया इकराम- 14, रिषभ त्रिपाठी- 8, विभांतिका द्विवेदी- 8, सलिहा खातून-7, अपूर्वा सिंह- 6, तंजिला सिद्दीकी- 6, निमिशा सिंह-5, शायर्ति प्रकाश- 5
  • इनको मिले चार मेडल : मुकेश कुमार, विकास कुमार, श्रेयांस रस्तोगी, श्रुति सक्सेना, अर्शिया परवीन, ज्योति वर्मा
  • इनको मिले तीन पदक : सोनी शुक्ला, स्वप्निल गुप्ता, मोनिका सक्सेना, विवेक कुमार चौधरी, स्वाति सिंह, यशी पांडेय
  • इनको मिले दो पदक : रक्षा सिंह, निवेदिता सिंह, दीपक द्विवेदी, सारादिल, उजाला, पंखुड़ी श्रीवास्तव, वर्तिका शुक्ला, रवि शाक्य, अर्चना चौरसिया, बुशरा नूर, मनुज दरबारी
  • इनको मिला एक पदक : अभय द्विवेदी, तुशिता सिंह, विकास पांडेय, मानसी जायसवाल, अंशिका मिश्रा, विक्की पांडेय, प्रिया बाजपेयी, मीनाक्षी शर्मा, स्वेच्छा द्विवेदी, श्वेता सिंह, आयुषी श्रीवास्तव, इंशा परवीन, अभिषेक नारायण, मणि शिवा सिंह, स्नेहा वर्मा, ज्योति विश्वकर्मा, सुजानवीर गौतम, लावी शुक्ला, संजय कुमार वर्मा, मृणाल मंजरी, प्रिया टंडन, सूर्जू हितनान, श्रेया गुप्ता, नादिरा खातून, फरहत इकराम, अभिलाषा पांडेय, रिषभ जायसवाल, अंजली ओझा, शिवांगी तिवारी, दिव्या भारती, शुभम दीक्षित, नेहा पांडेय, विशाल गर्ग, खुशबू मिश्रा, संदीप सिंह, प्रत्यूष श्रीवास्तव, सोनिया गुप्ता, जव्वाद हैदर, निपमिका प्रजापति, रवि कुमार, कामिनी सिंह, हर्षिता अवस्थी, पुलकित, महिमा वर्मा, वर्तिका पांडेय, आकृति तिवारी, शाहबाज नसीम अंसारी, कात्यायनी गुप्ता, आरिज हुसैन आब्दी, आस्था ओझा, डॉ. राजेश कुमार पटेल, डॉ. अनुराग कुमार यादव, डॉ. निलय तिवारी, डॉ. दुर्गेश वर्मा, डॉ. सोनल अग्रवाल,
  • वाइस चांसलर मेडल फॉर बेस्ट एनसीसी कैडेट- आनंद कुमार यादव
  • चांसलर्स गोल्ड मेडल- दुर्गेश कुमार त्रिपाठी
  • चांसलर्स ब्रोंज मेडल : शांभवी पांडेय, मुस्कान त्रिपाठी, चारु बाजपेयी, मानसी बाजपेयी, भावना कनौजिया, पलक गुप्ता, राम सुमेर, श्वेता मौर्या, शिवाशीष मिश्रा, प्रगति श्रीवास्तव
  • डॉ. चक्रवर्ती गोल्ड मेडल फॉर सर्विस- विभू बनर्जी
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