सिपाही के बराबर होमगार्ड का वेतन देने का फैसला होमगार्डों के लिए मायूसी का सबब बनने जा रहा है। बढ़े हुए वेतन के चक्कर में पुलिस महकमे ने तय किया है कि वह होमगार्ड से काम नहीं लेगा। यानी एक साल पहले गृह विभाग ने सिपाहियों के रिक्त पदों के स्थान पर जो 25 हजार होमगार्ड लगाए थे, उनकी सेवाएं समाप्त करने का आदेश दिया है। यह निर्णय उच्चतम न्यायालय के आदेश से गड़बड़ाए बजट को बैलेंस करने के लिए लिया गया है।
प्रदेश में होमगार्ड के पद 1 लाख 18 हजार हैं। इसमें से 19 हजार पद रिक्त हैं। पिछले महीने 92 हजार होमगार्ड की ड्यूटी लगाई जा रही थी जबकि उपलब्ध होमगार्ड की संख्या 99 हजार थी।
25 दिन ड्यूटी का मिलता था मौका
ड्यूटी रोटेट करके काम देने से प्रत्येक होमगार्ड को 25 दिन ड्यूटी का मौका मिलता था। अब 25 हजार ड्यूटी खत्म होने से रोटेशन में एक-एक होमगार्ड को महीने में अधिकतम 15-15 दिन का काम मिल पाएगा। ऐसे में उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश का लाभ मिलने के बजाए नुकसान होने जा रहा है।
उदाहरण के तौर पर पहले रोज 500 रुपये भत्ता और 25 दिन काम मिलने से उसे महीने में 12,500 रुपये मिलते थे। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उसे 672 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भत्ता मिलेगा, लेकिन काम 15 दिन का ही मिलेगा। यानी महीने भर में उसे 10 हजार 80 रुपये ही मिलेंगे।
जिलों को दिए गए 25 हजार होमगार्ड में से अधिकतर ट्रैफिक संचालन से जुड़े हैं। ऐसे में अचानक होमगार्ड की सेवा समाप्त होने से ट्रैफिक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। प्रमुख सचिव होमगार्ड अनिल कुमार ने बताया कि एक दिन की ड्यूटी के बदले 672 रुपये देने से मौजूदा बजट पर असर पड़ा है। नया बजट अगले सत्र में मिलेगा तब तक थोड़ी समस्या रहेगी।
25 हजार होमगार्ड हटाने की उन्हें कोई जानकारी नहीं मिली है। पुलिस के आदेश पर शासन स्तर पर निर्णय लिया जाएगा और आगे की रणनीति तय की जाएगी।
सार्वजनिक प्रतिष्ठानों पर लगे होमगार्डों की ड्यूटी पर भी संकट
प्रदेश में लगभग 9000 होमगार्ड सार्वजनिक प्रतिष्ठानों पर ड्यूटी कर रहे हें। यहां पहले प्राइवेट गार्ड ड्यूटी करते थे। अब इन स्थानों पर फिर से प्राइवेट गार्ड या फिर पीआरडी जवान को ड्यूटी देने पर विचार किया जा रहा है। यहां एक दिन की ड्यूटी के बदले 375 रुपये से 500 रुपये के बीच मिलता है। ऐसे में आने वाले दिन होमगार्डों के लिए और संकट भरे हो सकते हैं।