सिविल अस्पताल 400 बेड का अस्पताल है। यह नॉन कोविड अस्पताल है। फिलहाल यहां 170 के करीब मरीज भर्ती हैं। यहां पर औसतन 15 से 20 सिलेंडर की जरूरत हर रोज रहती है। दस फीसदी रोगियों को ही ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत पड़ती है। अफसरों का कहना है कि लॉकडाउन के वक्त खपत और भी कम थी।
उधर, रानीलक्ष्मीबाई अस्पताल में 30 से अधिक मरीज भर्ती हैं। यहां पर रोजाना महज चार से पांच सिलेंडर की खपत है। अस्पताल सीएमएस डॉ. अनिल कुमार आर्या के मुताबिक, मरीज कम होने से खपत भी कम हो रही है। लोकबंधु जब तक नॉन कोविड अस्पताल था यहां औसतन आठ से दस सिलेंडर 24 घंटे में लगते थे। कोविड अस्पताल बनने बाद खपत 100 तक पहुंची है।
अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट में कार्यरत एक कर्मचारी ने बताया कि कंपनी के जरिए जो ऑक्सीजन सिलेंडर भेजे जा रहे हैं, उसमें घटतौली हो रही है। जांच में हर सिलेंडर में आठ से दस लीटर गैस कम आ रही है। कर्मचारियों ने जिम्मेदारों को भी अवगत कराया, मगर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
ऑक्सीजन सिलेंडर की खपत इतनी अधिक होने के बारे में अभी जानकारी नहीं है। ऐसा कुछ होगा तो मामले की जांच कराई जाएगी। - डॉ. डीएस नेगी, स्वास्थ्य महानिदेशक
अस्पताल में मरीजों की तादाद अभी सीमित है। ऑक्सीजन सिलेंडर की इतनी अधिक खपत के बारे में मुझे जानकारी नहीं है, शिकायत मिलने पर मामले की जांच कराई जाएगी। - डॉ. आरके गुप्ता, सीएमएस, बलरामपुर अस्पताल
अस्पताल में मरीजों की तादाद अभी सीमित है। ऑक्सीजन सिलेंडर की इतनी अधिक खपत के बारे में मुझे जानकारी नहीं है, शिकायत मिलने पर मामले की जांच कराई जाएगी। - डॉ. आरके गुप्ता, सीएमएस, बलरामपुर अस्पताल