उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल के निजीकरण का विरोध बढ़ता जा रहा है। बिजली दर की सुनवाई के दौरान कर्मचारी संगठनों के साथ ही उपभोक्ताओं एवं किसानों ने जबरदस्त विरोध किया। अब लखनऊ में 21जुलाई को होने वाली जनसुनवाई में विरोध की तैयारी शुरू हो गई है। इसे लेकर संघर्ष समिति जनसंपर्क अभियान शुरू कर दी है तो उपभोक्ता परिषद तकनीकी बारीकियों पर सवाल खड़े करने की तैयारी में हैं।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि उपभोक्ताओं का निगमों पर बकाया 33122 करोड़ लौटाया जाए। इसके बाद बिजली दर बढ़ाने पर विचार होना चाहिए। जब तक उपभोक्ताओं का बकाया नहीं लौटाया जाता है तब तक बिजली दर नहीं बढ़ने दी जाएगी। जिस तरह से जनसुनवाई के दौरान हर वर्ग के लोग निजीकरण का विरोध कर रहे हैं, उसे तत्काल रद्द किया जाए।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने कार्पोरेशन प्रबंधन पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए आक्रोश जताया है। मुख्यमंत्री से मांग की है समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि 22 को लखनऊ में होने वाली जनसुनवाई के दिन प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन को व्यापक जन आंदोलन बनते देख पावर कार्पोरेशन प्रबंधन बौखलाया हुआ है। मनोबल तोड़ने के लिए मनमाने ढंग से उत्पीड़न किया जा रहा है।
बिजली कर्मियों के घरों पर रियायती बिजली की सुविधा समाप्त करने के लिए स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई है जो पूरी तरह से गलत है। डिजिटल हाजिरी के नाम पर करीब दो हजार से अधिक कार्मिकों का जून माह का वेतन रोक दिया गया है। इससे तमाम परिवार आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। लगभग 45 फीसदी संविदा कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।