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पुनर्वास विवि का दीक्षांत 29 को, अर्पिता को तीन स्वर्ण पदक

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डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विवि क ा दीक्षांत समारोह 29 नवंबर को होगा। समारोह में कुल 145 विद्यार्थियों को मेडल (53 स्वर्ण, 46 रजत व 46 कांस्य पदक) दिया जाएगा। विवि प्रशासन ने मेडल सूची पर भी अंतिम मुहर लगा दी है। इसके अनुसार बीटेक की छात्रा अर्पिता कुमारी को कुलाध्यक्ष स्वर्ण पदक समेत तीन, बीटेक के ही शिवम कुमार को कुलाध्यक्ष रजत समेत तीन पदक, अरविंद कुमार राठौर को डॉ. शकुंतला मिश्रा स्मृति स्वर्ण पदक समेत तीन स्वर्ण पदक दिए जाएंगे।
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दीक्षांत समारोह में 1100 विद्यार्थियों को डिग्री अवॉर्ड की जाएगी। रजिस्ट्रार अमित कुमार सिंह ने बताया कि दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल व कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल करेंगी। जल्द ही मुख्य अतिथि का नाम फाइनल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि दीक्षांत समारोह ऑफलाइन मोड में सुबह 10:30 बजे से आयोजित किया जाएगा। दीक्षांत समारोह में कई प्रमुख बिल्डिंगों का उद्घाटन भी कराया जाएगा।
1. सरकारी स्कूलों की सुधारनी है स्थिति
अभी मैं आईईटी से एमटेक कर रही हूं। इसके साथ ही यूपीएससी की तैयारी भी। मैं आईएएस बनकर सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए काम करूंगी। मैंने देखा है कि दिव्यांग विद्यार्थियों को स्कूली शिक्षा मिलने में काफी दिक्कत होती है। इनके लिए विशेष स्कूल व और विवि शुरू करने की जरूरत है। पिता परमानंद प्रसाद रेलवे अधिकारी व मां सरिता कुमारी गृहिणी हैं। सीएमएस से 10वीं व 12वीं की पढ़ाई पूरी की है और यहां से बीटेक।
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- अर्पिता कुमारी, बीटेक, कुलाध्यक्ष स्वर्ण पदक
2. पढ़ाई के लिए पिता ने बेचनी पड़ी जमीन
अभी भी हमारे ग्रामीण क्षेत्र पिछड़े हुए हैं। इसमें बदलाव के लिए काफी काम करने की जरूरत है और यही मेरा लक्ष्य है। मैं डीयू या जेएनयू से पीजी करके सिविल सर्विस की तैयारी करना चाहता हूं। पिता राम अवतार वर्मा किसान हैं। जिन्होंने मेरी उच्च शिक्षा की पढ़ाई के लिए अपनी जमीन भी बेची। मैं एक आईएएस बनकर सबसे पहले उनकी जमीन वापस दिलाना चाहता हूं। इंटर के बाद मुझे उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक दिक्कत हुई तो पिता के साथ, गांव के भी लोगों ने सहयोग किया। मां सुनीता देवी आंगनबाड़ी कार्यकत्री हैं।
- अभिषेक कुमार, बीए, मुख्यमंत्री स्वर्ण पदक
3. दिव्यांगों को नहीं मिल पाती सुविधाएं
मैं जन्म से दृष्टि दिव्यांग हूं। मैंने यह देखा है कि दिव्यांगों की सुविधाओं को लेकर बातें तो बहुत होती हैं लेकिन उतनी सुविधाएं मिलती नहीं हैं। दिव्यांगों को ब्रेल लिपि में किताबें नहीं मिल पाती हैं। ऑडियो स्टडी मैटेरियल से पढ़ाई होती है। सरकार को इस तरफ और ध्यान देने की जरूरत है। पीजी करके सिविल सर्विस की तैयारी करूंगा और आईएएस बनकर उक्त क्षेत्र में काम करूंगा। पिता मथुरा प्रसाद राठौर इलेक्ट्रीशियन हैं और मां अनीता राठौर गृहिणी हैं।
- अरविंद कुमार राठौर, बीएड, डॉ. शकुंतला मिश्रा स्मृति व संस्कृति स्वर्ण पदक
4. दिव्यांगों को मिले स्कूली शिक्षा
मैं एमएड करके स्पेशल एजुकेशन के क्षेत्र में रिसर्च करके उनके जीवन को आसान बनाने का प्रयास करूंगी। मैंने देखा है कि ग्रामीण दिव्यांग बच्चों को स्कूली शिक्षा नहीं दिलाते हैं। स्कूलों द्वारा भी प्रवेश देने में आनाकानी की जाती है। ऐसे में उनकी क्षमता भी समाप्त हो जाती हैं। हमें इस तरह के स्कूलों की संख्या और बढ़ानी चाहिए। ताकि उन्हें शुरुआती शिक्षा मिलेगी तो वह आसानी से आगे बढ़ सकेंगे। पिता एसएस शुक्ला डिफेंस में हैं और मां अंजू शुक्ला गृहिणी हैं।
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- स्वाती शुक्ला, बीएड, मुख्यमंत्री रजत पदक
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