सपा सरकार सोनिया और राहुल के खिलाफ अपने उम्मीदवार नहीं उतारेगी। अब राहुल ने अखिलेश का यह एहसान उतारने का मन बनाया है।
खबर है कि कांग्रेस ने भी मैनपुरी व कन्नौज लोकसभा सीट पर अपने प्रत्याशी न खड़ा करने का मन बना लिया है।
मैनपुरी से सपा के मुखिया मुलायम सिंह यादव खुद चुनाव लड़ते हैं, जबकि कन्नौज से उनकी बहू व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव चुनाव लड़ेंगी।
सपा ने रायबरेली से अपना प्रत्याशी खड़ा न करने की घोषणा पहले ही कर दी थी। शुक्रवार को अखिलेश यादव ने अमेठी से भी सपा प्रत्याशी न उतारने के संकेत दिए।
उन्होंने साफ किया कि कांग्रेस के साथ उनका यह सियासी शिष्टाचार है। रायबरेली से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी चुनाव लड़ती हैं जबकि अमेठी उनके पुत्र व कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का चुनाव क्षेत्र है।
ऐसा 2009 में भी हुआ था
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार सपा के इसी सियासी शिष्टाचार पर अमल करते हुए कांग्रेस ने भी मैनपुरी व कन्नौज से अपने प्रत्याशी न उतारने का मन बना लिया है।
वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने दोनों ही जगह अपने प्रत्याशी नहीं उतारे थे। उस समय कन्नौज से अखिलेश यादव चुनाव मैदान में थे।
पिछले विधानसभा चुनाव में जब यूपी में सत्ता बदली और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।
इसके बाद हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी डिंपल यादव निर्विरोध ही चुनाव जीत गई थीं।
रामपुर से नसीद सपा प्रत्याशी
सपा ने लोकसभा की रामपुर सीट से नसीद अहमद खां को उम्मीदवार घोषित किया है। यह जानकारी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव ने दी।
माना जा रहा है कि सपा नेतृत्व ने नगर विकास व संसदीय कार्यमंत्री मो. आजम खां की सलाह पर उन्हें उम्मीदवार घोषित किया है।
नसीद अहमद खां आजम के काफी नजदीकी लोगों में गिने जाते हैं। सपा ने विधानसभा चुनाव में भी नसीद को चमरउवा से टिकट दिया था लेकिन वह कुछ वोटों से पराजित हो गए थे।
'मोदी से एकता को खतरा'
सपा के प्रदेश प्रवक्ता और कारागार मंत्री राजेंद्र चौधरी ने कहा कि नरेंद्र मोदी सत्ता में आए तो देश की एकता और अखंडता को खतरा बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस और भाजपा दोनों झूठे वादों पर चुनाव को प्रभावित करने की साजिश कर रहे हैं। सत्ता हथियाने के लिए उन्हें सिद्धांतों से किनाराकशी करने में भी परहेज नहीं है।
कांग्रेस ने समाजवाद के नाम पर समाज में गैर बराबरी को बढ़ावा दिया। गरीबी हटाओ का नारा देकर गरीबों को ही उजाड़ने का काम किया। लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ करते हुए कांग्रेस ने आपातकाल लगाया था।