कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा।
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कांग्रेस अब यूपी में गठबंधन की राजनीति पर फोकस करेगी। विधानसभा में अकेले लड़ने से हुई फजीहत के बाद इस दिशा में गंभीरता से मंथन हो रहा है। प्रदेश में कांग्रेस संसदीय इतिहास के सबसे खराब दौर से गुजर रही है। इस विधानसभा चुनाव में उसकी ‘एकला चलो’ की नीति के कारण उसे ढाई फीसदी वोट भी नहीं मिले और दो सीटों पर सिमट गई।
सूत्रों का कहना है कि पार्टी अपनी रणनीति पर पुनर्विचार कर रही है। चुनाव से पहले पार्टी ने कई नए प्रयोग किए, पर अपेक्षित सफलता नहीं मिली। रणनीतिकारों का मानना है कि मुद्दे ठीक थे, संघर्ष का मॉडल भी ठीक था, पर जनता का भरोसा नहीं जीत सके।
कांग्रेस ने यूपी में गठबंधन की राजनीति को ध्यान में रखते हुए जगह बनाने की कार्ययोजना तैयार की है। यही वजह है कि पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी और बाद में मल्लिकार्जुन खड़गे ने यूपी विधानसभा चुनाव से पहले बसपा से गठबंधन के प्रयासों का खुलासा किया। इतना ही नहीं चुनाव से पहले राहुल ने अमेठी से जुड़े पार्टी के एक वरिष्ठ नेता से भी चर्चा की थी।
हाईकमान का मानना है कि जिस तरह से तमिलनाडु और बिहार में कांग्रेस प्रमुख क्षेत्रीय दलों के साथ चुनाव लड़ती है, वैसी ही संभावनाएं यहां भी तलाश की जाएं। बिहार में कांग्रेस ने 19 सीटें जीती थीं। वहां आरजेडी और वामपंथी पार्टियों के साथ महागठबंधन में है। तमिलनाडु में कांग्रेस ने डीएमके के साथ चुनाव लड़ा और उसके हिस्से 18 सीटें आईं। अब इसी तरह का प्रयोग यूपी के लोकसभा चुनाव में करने पर विचार चल रहा है।