पहला : पंजाब और लखीमपुर में कांग्रेस का पैंतरा
दलितों पर दांव को लेकर बसपा कांग्रेस से अदावत मानकर चल रही है। इनमें अहम कारण यह है कि पंजाब में चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाकर कांग्रेस ने वहां बड़ा दलित कार्ड खेला जबकि वहां कांग्रेस व बसपा आमने-सामने हैं। इतना ही नहीं, लखीमपुर खीरी में चन्नी की जबरदस्त आमद कराई गई और उन्होंने यहां तिकुनिया प्रकरण के पीड़ित किसानों को 50-50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी। बसपा मानकर चल रही है कि कांग्रेस का यह निशाना पूरी तरह से बसपा के काडर वोटर को साधने के लिए है।
दूसरा : भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर से प्रियंका की मुलाकात
मार्च 2019 में प्रियंका गांधी अचानक भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद से मिलने अस्पताल पहुंच गई थीं। दरअसल चंद्रशेखर ‘बहुजन अधिकार यात्रा’ निकाल रहे थे। अचानक तबीयत खराब होने पर उन्हें मेरठ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां अचानक प्रियंका गांधी तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर व तत्कालीन पश्चिमी यूपी प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया को साथ लेकर उनसे मिलने पहुंच गईं और कहा कि चंद्रशेखर का संघर्ष उन्हें पसंद आया। बसपा मानकर चल रही है कि चंद्रशेखर से उनकी यह मुलाकात अनायास नहीं बल्कि बसपा के खिलाफ सुनियोजित थी।
बसपा की निगाह इस विधानसभा चुनाव के साथ-साथ वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव पर भी है। बसपा थिंक टैंक को लग रहा है कि इस चुनाव में यदि कांग्रेस से हाथ मिलाया गया तो इसके दूरगामी प्रतिकूल परिणाम हो सकते हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में कहीं उसका काडर वोटर उससे छिटक न जाए क्योंकि भाजपा भी पूरी तरह से उसके वोटर को रिझाने की कोशिश में है। ऐसे में उसको नुकसान हो सकता है।