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यूपी : कांग्रेस का घटता कुनबा संगठन के लिए बड़ी चुनौती, कई कद्दावर नेताओं ने किया किनारा, कुछ तैयारी में

Mon, 25 Oct 2021 03:11 AM IST
दुष्यंत शर्मा अजीत बिसारिया, लखनऊ

सार

हालत यह है कि पूरब से पश्चिम और अवध से बुंदेलखंड तक कद्दावर नेता कर रहे हैं किनारा।
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प्रियंका गांधी और अजय कुमार लल्लू - फोटो : अमर उजाला
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यूपी में कांग्रेस का घटता कुनबा पार्टी संगठन के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। पूरब से पश्चिम और अवध से बुंदेलखंड तक पुराने कद्दावर नेता किनारा कर रहे हैं। कई और इस फेहरिस्त में शामिल होने की तैयारी में बताए जाते हैं। पार्टी छोड़ने वाले नेता इसका कारण संगठन नेतृत्व से नाराजगी बता रहे हैं, पर अंदरखाने कहीं न कहीं चुनाव के लिहाज से सुरक्षित ठौर की तलाश उनके बाहर जाने की मूल वजह मानी जा रही है।

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कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की प्रदेश में सक्रियता बढ़ने के बीच पार्टी को एक के बाद एक झटकेलग रहे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद कांग्रेस को बाय-बाय कहकर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बन चुके हैं। वहीं, मड़िहान (मिर्जापुर) से विधायक रहे ललितेश पति त्रिपाठी का कांग्रेस छोड़ना पुरानी पीढ़ी के कांग्रेसियों में चर्चा का सबब बना हुआ है। चार पीढ़ियों से उनका परिवार कांग्रेस से न सिर्फ जुड़ा रहा, बल्कि सरकार और संगठन में अहम ओहदों पर भी रहा। उनके परबाबा स्वर्गीय कमला पति त्रिपाठी जहां प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, वहीं दादा लोकपति त्रिपाठी प्रदेश सरकार में मंत्री, दादी चंदा त्रिपाठी सांसद और पिता राजेश पति त्रिपाठी एमएलसी रहे।

राठ (हमीरपुर) से विधायक रहे गयादीन अनुरागी कांग्रेस को छोड़ सपा का दामन थाम चुके हैं। वह कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष भी थे। कोरी (दलित) जाति के अनुरागी ने पार्टी छोड़ते वक्त पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा था कि कांग्रेस में वह असहज महसूस कर रहे थे। हाल में ही चार बार के विधायक और सांसद रहे हरेंद्र मलिक और उनके बेटे व पूर्व विधायक पंकज मलिक ने भी कांग्रेस को टाटा कह दिया है। शामली के रहने वाले यह पिता-पुत्र कांग्रेस के जाट चेहरों के रूप में पहचाने जाते थे। पंकज मलिक कहते हैं, ‘पिताजी को कुछ नाराजगी थी। उन्होंने पार्टी छोड़ने का मन बनाया, तो मैंने भी कार्यकर्ताओं की इच्छा के अनुसार वही निर्णय लिया।’ नाराजगी के मुद्दे पर बात किए जाने पर पंकज ने कहा कि शीघ्र ही इस बारे में खुलासा करेंगे।
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अकबरपुर (कानपुर देहात) से सांसद रहे राजाराम पाल भी कांग्रेस से किनारा कर सपा में शामिल हो चुके हैं। खास बात यह है कि वह हाल तक प्रियंका गांधी के सलाहकार समिति के सदस्य रहे थे। इसी तरह से वर्ष 2007-2012 के बीच कालपी (जालौन) से विधायक रहे विनोद चंद्र चतुर्वेदी ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्नाव से पूर्व सांसद अनु टंडन, अलीगढ़ से चार बार के विधायक और सासंद भी रहे ब्रजेंद्र सिंह भी सपा में जा चुके हैं। प्रतापगढ़ की पूर्व सांसद रत्ना सिंह, अमेठी के पूर्व सांसद संजय सिंह व उनकी पत्नी अमिता सिंह को भी जोड़ें तो कांग्रेस छोड़ने वालों की यह फेहरिस्त और लंबी हो जाएगी। कांग्रेस के ही एक प्रमुख नेता और वर्तमान में जनप्रतिनिधि ने नाम न छापने के अनुरोध पर बताया कि तीसरी व चौथी कतार के सैकड़ों नेता पार्टी छोड़ चुके हैं। इस ओर गंभीरता से ध्यान दिए जाने की जरूरत है।

लड़ने वाले टिकेंगे, डरने वाले भागेंगे
प्रदेश में कांग्रेस पार्टी जनता के बुनियादी अधिकारों और सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है। राहुल गांधी संविधान बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं और प्रियंका गांधी प्रदेश की जनता की समस्याओं के समाधान के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं। ऐसे में लड़ने का माद्दा रखने वाले ही पार्टी में टिकेंगे और डरने वाले पार्टी छोड़कर कहीं और का रुख करेंगे।
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-अजय कुमार लल्लू, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस 

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