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यूपी विधानसभा चुनाव 2022 के लिए कांग्रेस की रणनीति तैयार, ब्राह्मणों, अति पिछड़ों व मुसलमानों पर कांग्रेस की विशेष नजर

Thu, 20 Aug 2020 11:44 AM IST
ishwar ashish अजीत बिसारिया, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
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आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस ने प्रदेश के जातिगत समीकरणों पर काम शुरू कर दिया है। पार्टी हाईकमान को भरोसा है कि  ब्राह्मणों, अति पिछड़ों और मुसलमानों के बीच काम करके यूपी में सत्ता का वनवास खत्म किया जा सकता है। सोशल मीडिया पर पोस्ट से लेकर व्यक्तिगत संपर्क तक इसी रणनीति के तहत किया जा रहा है। 

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पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को यूपी की कमान सौंपे जाने के बाद कांग्रेस ब्राह्मणों को लेकर काफी आशान्वित है। उनके बीच लगातार पैठ बनाने की कोशिश कर रही है। प्रदेश में ब्राह्मणों के खिलाफ हो रहे आपराधिक मामलों को कांग्रेस जोर-शोर से उठा रही है। प्रियंका इन मामलों पर ट्वीट करके अपना विरोध दर्ज करा रही हैं, वहीं प्रदेश कांग्रेस के अन्य नेता पीड़ित लोगों के घर जाकर संपर्क कर रहे हैं।

पार्टी हाईकमान ने अति पिछड़ों के बीच जाने का निर्णय भी किया है। अपने स्थानीय नेताओं से कहा है कि वे उनके बीच जाकर पूछें कि केंद्र व राज्य सरकार ने उन्हें क्या दिया। जबकि, वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव और वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में अति पिछड़ों ने भाजपा का एकतरफा साथ दिया था।
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प्रदेश की राजनीति में साबित हो चुका है कि अलग-अलग रहकर अति पिछड़ी जातियां कोई ताकत नहीं हैं, लेकिन अगर ये एक साथ आ जाएं तो हार-जीत के समीकरण बदल सकती हैं। इसलिए कांग्रेस ने अति पिछड़ी जातियों पर ध्यान केंद्रित करने का निर्णय किया है। इनमें दर्जी, इदरीसी, भुर्जी, कसौधन, माली, सैनी, नोनिया, मंसूरी, कंडेरे, कोइरी, गुर्जर, लोहार, फकीर, गोले ठाकुर, बढ़ई, विश्वकर्मा, रमगढ़िया, धीमर, भर, राजभर, हज्जाम, नाई, कहार, कुम्हार, काछी आदि प्रमुख हैं।

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अल्पसंख्यक मोर्चे की भी बढ़ाई काफी सक्रियता

कांग्रेस हाईकमान ने प्रदेश नेतृत्व से कहा है कि वे अति पिछड़ी जातियों के लोगों के बीच अधिक से अधिक जाएं। उनके बीच असर रखने वाले स्थानीय सजातीय नेताओं को भी अपने साथ लाने का प्रयास करें। पार्टी ने अपने अल्पसंख्यक मोर्चे की भी सक्रियता काफी बढ़ाई है। पूर्वांचल और अवध में अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के नेता लगातार आम मुस्लिम मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं।

उनसे कह रहे हैं कि समाजवादी पार्टी ने मुस्लिम बुद्धिजीवियों को शायर बनाने के अलावा कोई काम नहीं किया। जबकि कांग्रेस ने बिहार समेत कई प्रदेशों में मुसलमान को मुख्यमंत्री तक बनाया है। अगर मुसलमानों को अपनी सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक स्थिति बेहतर करनी है तो उन्हें कांग्रेस से जुड़ना होगा। राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस ही भाजपा को सत्ता से बेदखल कर सकती है। 

कांग्रेस ने कभी जात-पात और धर्म या संप्रदाय आधारित राजनीति नहीं की। यह बात सही है कि हम अति पिछड़ों, दलितों, मुसलमानों और ब्राह्मणों के बीच जा रहे हैं, क्योंकि उन पर भाजपा सरकार में लगातार जुल्म हो रहे हैं। - अजय कुमार लल्लू, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस 
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