पिछले चुनाव में आठ वार्डों में जीतने वाली कांग्रेस आपसी कलह के चलते पिछला आंकड़ा भी नहीं छू सकी। इस बार कांग्रेस ने महज चार सीटों पर ही जीत दर्ज की। यह हाल तब है जबकि नामांकन के दिन तक पार्टी प्रत्याशियों को बदलती रही। वहीं इस बार दो सीटें तो उन कार्यकर्ताओं के कारण कम हो गईं जो पार्टी की उपेक्षा और नेताओं की मनमानी से दूसरे दल में चले गए और चुनाव भी जीत गए।
इस बार जिन सीटों पर पार्टी के पार्षद जीते हैं, उनमें मालवीय नगर वार्ड से ममता चौधरी, गोमतीनगर वार्ड से कौशल शंकर पांडेय, इस्माइलगंज प्रथम से मुकेश सिंह चौहान और मौलाना कल्बे आबिद वार्ड से इफहामुल्लाह फैज हैं। जो दो जिताऊ सीटें इस बार पार्टी ने गंवाई हैं, उनमें एक महात्मा गांधी वार्ड और दूसरी रामजीलाल सरदार पटेल वार्ड की है। महात्मा गांधी वार्ड से अमित चौधरी को इस बार पार्टी ने मांगने के बाद भी टिकट नहीं दिया। अंत में वह बसपा में चले गए और चुनाव भी जीते।
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इसी तरह रामजीलाल सरदार पटेल वार्ड के पार्षद रहे गिरीश मिश्र पार्टी नेताओं की उपेक्षा के चलते भाजपा में चले गए। इस बार उन्होंने पत्नी को भाजपा से चुनाव लड़ाया और वे जीत भी गईं। गिरीश ऐसे पार्षद हैं जो पिछले 25 साल से भाजपा के गढ़ में पार्टी को जीत दिला रहे थे। पिछले बार जो आठ पार्षद जीते थे उनमें दो साल पहले कोरोना के समय ओम नगर के पार्षद राजेंद्र सिंह गप्पू और राजाबाजार वार्ड की पार्षद शहनाज की मृत्यु हो गई थी। ऐसे में यह दो जिताऊ सीटें वैसे ही पार्टी के हाथ से निकल गईं थीं।
ऐन चुनाव के मौके पर बगावत से भी कमजोर हुई कांग्रेस
चुनाव के मौके पर शहर कांग्रेस के अध्यक्ष दिलप्रीत सिंह और अजय श्रीवास्तव अज्जू भाजपा में चले गए। उनके साथ कई और कार्यकर्ता भी चले गए। टिकट बंटवारे को लेकर विवाद से कई जगह अधिकृत प्रत्याशी ही तय नहीं हो पाए। एक बार तो प्रत्याशियों की जारी सूची को ही फर्जी बताया गया। बाद में कोई नई सूची भी नहींं जारी की गई। महापौर प्रत्याशी का नाम तो नामांकन के दिन ही खोला गया।