देश-प्रदेश में भाजपा के ऐतिहासिक उभार ने कांग्रेस को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए बाध्य किया है। यही वजह है कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने यूपी चुनाव अभियान की वाराणसी में हुई पहली रैली में अपने संबोधन की शुरुआत दुर्गा स्तुति से की। ‘जय माता दी’ का जयकारा लगवाया। वह यह बताना भी नहीं भूलीं कि आज उनका नवरात्र का चौथा व्रत है।
पिछले माह सितंबर में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी जम्मू में माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए गए थे।
मुस्लिम वोट दूर जाने का खतरा
बीएचयू के राजनीति विज्ञान के प्रो. कौशल किशोर मिश्रा का कहना है कि यूपी में हिंदू प्रतीक चुनावी हथियार बन चुके हैं। पहले कांग्रेस की रैलियों में धार्मिक प्रतीकों से परहेज किया जाता था, ताकि धर्म निरपेक्ष छवि को बनाए रखा जा सके। मेरी समझ कहती है कि इस तरह से हिंदू प्रतीकों का इस्तेमाल मुसलमानों को कांग्रेस से दूर कर देगा। इस रणनीति से कांग्रेस को ज्यादा फायदा होने पर संदेह है।
वरिष्ठ समाजशास्त्री एवं सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. आनंद कुमार का कहना है कि शाहबानो प्रकरण को जिस तरह से तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने हैंडिल किया, उससे कांग्रेस पर ये आरोप लगते रहे हैं कि वह हिंदू अस्मिता और हिंदू हितों से ज्यादा मुस्लिम अस्मिता और मुस्लिम हितों को तरजीह देती है। सोनिया गांधी के समय में ये आरोप और प्रबल हुए। हालांकि, इंदिरा गांधी समय-समय पर मंदिरों में जाती रहती थीं। इसलिए उन पर मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोप उतनी तीव्रता के साथ नहीं लगे। उत्तर भारत में जातीय और धार्मिक अस्मिता की भावना पिछले कई चुनावों में बलवती रही है। प्रियंका का चुनावी रैली में दुर्गा स्तुति इसी रणनीति का हिस्सा है। पार्टी की छवि बदलने का प्रयास है। हालांकि, मेरा मानना है कि इस बार सुविधाएं, रोजगार, पढ़ाई और महंगाई के मुद्दे अहम होंगे।