जानकारों के मुताबिक इस पर गंभीरता से विचार हो रहा है। पर, कांग्रेस बसपा से भी संपर्क साध रही है। गणित यह तैयार किया जा रहा है कि बसपा, रालोद और कांग्रेस अगर साथ आएं तभी कुछ मजबूती आ सकती है। उधर, बसपा भी इस पूरे सीन पर पैनी नजर रखे है। चूंकि बसपा के मजबूत सिपहसालार भी लगातार पार्टी छोड़ रहे हैं। ऐसे में नए समीकरण बसपा को भी संजीवनी दे सकते हैं।
...पर सीटों पर दावे से खड़ा होगा संकट
जिन सीटों पर रालोद और सपा के अपने-अपने दावे हैं, उन्हीं सीटों पर बसपा भी अपने को मजबूत मानती है। मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, मेरठ, मुरादाबाद, बुलंदशहर, बिजनौर की सीटों पर रालोद इस समय मजबूत दावा पेश कर रही है। सपा के साथ भी इन्हीं सीटों पर सबसे ज्यादा मंथन है। यदि नया गठबंधन हुआ तो इन्हीं सीटों पर फिर से अपने-अपने दावे होंगे।
बसपाई रणनीतिकार भी इस नई चर्चाओं का गहनता से अध्ययन कर रहे हैं। उनकी निगाह इन्हीं सीटों पर है। हालांकि प्रत्यक्ष तौर पर सपा और रालोद नेता दोनों ही इन चर्चाओं के बजाय इसी बात पर जोर दे रहें है कि सपा और रालोद का गठबंधन है और मजबूती से चुनाव लड़ेगा। जल्द ही सीटों का बंटवारा हो जाएगा।