कांग्रेस की तरफ से लोकसभा चुनाव को लेकर निश्चिंतता दिखाने की चाहे जितनी कोशिशें हो रही हों लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में पार्टी के रणनीतिकार अंदर ही अंदर काफी चिंतित हैं। वे कोई नया पंगा मोल लेने या मोर्चा खोलने से बच रहे हैं। सुल्तानपुर से पार्टी सांसद डॉ. संजय सिंह को असम के कोटे से राज्यसभा भेजने के फैसले से यह बात पूरी तरह साबित हो जाती है।
कांग्रेसियों ने ही किया था विश्वासघात
वैसे तो संजय सिंह की कांग्रेस आलाकमान से नाराजगी वर्ष 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में पत्नी के पराजय के साथ ही शुरू हो गई थी। संजय सिंह चाहते थे कि जिन कांग्रेसियों ने चुनाव में विश्वासघात करके उनकी पत्नी अमिता सिंह को चुनाव में पराजित करा दिया, उन पर आलाकमान कार्रवाई करे। पर, कांग्रेस आलाकमान संजय की नाराजगी की अनदेखी करता रहा। संजय सिंह ने भी भाजपा में उम्मीदें तलाशनी शुरू कर दीं। भाजपा भी संजय सिंह को राहुल गांधी के खिलाफ मैदान में उतारकर उन्हें अमेठी में ही घेरे रखना चाहती थी, पर संजय की तरफ से राज्यसभा भेजने की शर्त में मामला उलझ गया।
कुमार विश्वास और मोदी का खौफ
इसी बीच, दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों में आम आदमी पार्टी ‘आप’ के उभार से देश की सियासी समीकरणों में बदलाव शुरू हो गया। दिल्ली में कांग्रेस के समर्थन से सरकार चला रही ‘आप’ ने लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ उम्मीदवार उतारने का ऐलान कर दिया। ‘आप’ के प्रमुख नेता कुमार विश्वास कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी के खिलाफ ताल ठोकने अमेठी पहुंच गए। एक तरफ चार राज्यों के विधानसभा चुनाव में करारी हार और दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी व भाजपा से निपटने की चुनौती से परेशान कांग्रेस को समझौता कर लेने में ही भलाई लगी।
राहुल की नैया पार लगाने की कोशिश
कांग्रेस के रणनीतिकार समझ गए कि संजय सिंह के समर्थक जिस तरह पिछले डेढ़ साल से कांग्रेसियों के विश्वासघात का बदला लेने की टिप्पणियां कर रहे हैं, वे राहुल के विजय रथ के लिए संकट बन सकती हैं। नतीजतन कांग्रेस आलाकमान को संजय सिंह को राज्यसभा भेजकर उन्हें मना लेने में ही भलाई लगी। एक तरह से कांग्रेस ने इस फैसले के जरिये संजय सिंह पर ही राहुल को अमेठी से चुनाव जिताकर भेजने का नैतिक दबाव भी बना दिया है। चर्चा है कि कांग्रेस अमेठी की जिम्मेदारी संजय सिंह पर डाल देगी, जिससे राहुल ज्यादा आसानी व बेफिक्री के साथ देशभर में चुनावी सभाएं कर सकेंगे।
राजनाथ सिंह भी एक फैक्टर
डॉ. संजय सिंह के जरिये कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में क्षत्रिय समीकरण को दुरुस्त करने का रास्ता भी तलाशा है। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के पास इस समय सूबे में संजय सिंह से ज्यादा प्रभावी कोई चेहरा नहीं था जिससे वह क्षत्रियों को अपने पक्ष में लामबंद करने की कोशिश करती। कांग्रेस को यह भी लग रहा है कि बदले माहौल में भाजपा को राजनाथ सिंह के नाते क्षत्रियों का वोट मिल सकता है। प्रदेश में किसी दूसरी पार्टी के पास बड़ा क्षत्रिय चेहरा न होने से राजपूतों का पूरा वोट भाजपा के पक्ष में लामबंद हो सकता है। इसे भी ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने डॉ. संजय सिंह को राज्यसभा भेजकर मना लेने में ही भलाई समझी।
विश्वास ने फिर बोला हमला
‘आप’ नेता डॉ. कुमार विश्वास ने बुधवार को अमेठी में ताबड़तोड़ सभाएं कर राहुल गांधी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि जनता ने बड़े-बड़ों को सबक सिखाया है। जनता की नुमाइंदगी करने वाले जब मुंह फेर लेते हैं तो उसका जवाब भी उन्हें ऐसा ही मिलता है। अमेठी की जनता राहुल गांधी के 10 साल के कार्यकाल का हिसाब मांग रही है। चुनाव में इसका नतीजा कांग्रेस को भुगतना पड़ेगा। विश्वास ने कहा कि अशिक्षा, बेरोजगारी और गरीबी का दंश झेल रही अमेठी की जनता अब जमीनी हकीकत समझ चुकी है। अमेठी के लोग अब और बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं। कई वर्ष से एक ही परिवार की जंजीरों में जकड़े लोग आजाद होना चाह रहे हैं। इतिहास अपने को दोहराता है। 2014 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर अमेठी 1977 के इतिहास को दोहराने जा रहा है।