प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ मंत्री मो. आजम खां ने मुस्लिमों को आगाह किया कि यदि वे टुकड़ों में बंटे तो नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन जाएंगे। मुजफ्फरनगर कांड पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि यह कांड हुकूमत की देन नहीं था। यह अफसरों के निकम्मेपन का नतीजा भले ही हो सकता है लेकिन हम षड्यंत्रकारी नहीं हैं। कुछ सियासतदां हमें अपनों से जुदा करना चाहते हैं।
कौन है इस षड्यंत्र के पीछे
आजम खां मंगलवार को अनुदानित मदरसों के प्रबंधकों व प्रधानाचार्यों के सम्मेलन में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर में दंगा हुआ, इसके बाद वहां महिलाओं की आबरू लूटी गई। इसमें हुकूमत को बदनाम किया गया। उन्होंने मीडिया पर भी निशाना साधा। कहा कि इस कांड के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इस षड्यंत्र के पीछे कौन है, इसे मीडिया नहीं दिखा रहा।
मुलायम ही मुस्लिमों के सच्चे हितैषी
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ने कहा कि मुलायम सिंह यादव ही मुस्लिमों के सच्चे हितैषी हैं। अकेले वे ही ऐसे नेता हैं जिनके लिए मस्जिदों में दुआएं होती हैं। उन्होंने कहा कि हम आबादी का पांचवां हिस्सा हैं। ऐसे में हमें देश के भविष्य के लिए सोचना होगा। उन्होंने मदरसा संचालकों से कहा कि हम दुश्मन का मुकाबला तालीम की धार से कर सकते हैं। इस मौके पर काफी संख्या में मदरसा संचालक उपस्थित हुए।
एक बार दिल्ली का खजाना मिल जाए
आजम ने कहा कि आप इस बार मुलायम सिंह यादव को दिल्ली की गद्दी पर बैठा दो। यदि एक बार दिल्ली का खजाना हाथ लग जाए तो उत्तर प्रदेश में किसी भी चीज की कोई कमी नहीं रह जाएगी। सपा सरकार ने ही अल्पसंख्यकों को सबसे ज्यादा दिया है।
मदरसों को बताया था ISI का अड्डा
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री बोले, ‘राजनाथ सिंह ने एक बार कहा था कि नेपाल से लेकर कश्मीर तक मदरसे आईएसआई के अड्डे हैं। उस समय मैं विधायक था। इसके बावजूद राजनाथ सिंह के इस कथन का मैंने विरोध किया था। हमने कहा था कि हम वे लोग नहीं हैं जो बोर्ड कु़छ लगाएं और काम कुछ और करें।’ आजम ने कहा कि हमारी हुकूमत मुकदमे वापस लेना चाहती थी लेकिन मीडिया ने ऐसा माहौल बना दिया कि हमें भी अपने कदम पीछे खींचने पड़े।
इबादतगाह की जगह इबादतगाह ही बननी चाहिए
आजम ने कांशीराम का नाम लिए बगैर कहा कि कुछ लोग बाबरी मस्जिद वाले स्थान पर शौचालय बनवाना चाहते थे, लेकिन हम साफ कर देना चाहते हैं कि इबादतगाह की जगह इबादतगाह ही बननी चाहिए। बाबरी मस्जिद से हमने अपना हक नहीं छोड़ा है। उन्होंने कहा कि सच्चर कमेटी की सिफारिशों को लागू करने के लिए यदि केंद्र सरकार इतनी ईमानदार है तो वह बिल क्यों नहीं लाती। अगर बिल ले आए तो पता चल जाएगा कि कौन सी पार्टी इसकी विरोधी है और कौन इसकी समर्थक।