सिटी मॉन्टेसरी स्कूल की छह शाखाओं की मान्यता पर सवाल खड़ा हो गया है। स्कूल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में कहा गया है कि काउंसिल फॉर दी इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशंस (सीआईएससीई) की वेबसाइट पर स्कूल की 18 शाखाओं में से 12 शाखाओं की मान्यता ही दर्शाई गई है।
आईसीएसई और आईएससी द्वारा शेष शाखाओं की मान्यता का ब्यौरा नहीं है। शिकायती पत्र पर बेसिक शिक्षा अधिकारी ने स्कूल से मान्यता संबंधी दस्तावेज तलब किए हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता संदीप पांडेय और प्रवीण श्रीवास्तव ने पत्र के माध्यम से बेसिक शिक्षा कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई है कि सीएमएस की 18 में से 12 शाखाओं की ही मान्यता है। उन्होंने पत्र के माध्यम से कहा है कि सीआईएससीई की वेबसाइट पर सीएमएस की राजेंद्रनगर की दो शाखा व राजाजीपुरम, अलीगंज, जॉपलिंग रोड और अशर्फदाबाद की शाखा को आईसीएसई व आईएससी द्वारा मान्यता प्रदान करने को लेकर किसी प्रकार ब्यौरा नहीं है।
मान्यता संबंधी दस्तावेज तलब
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- फोटो : amar ujala
शिकायती पत्र मिलने के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण मणि त्रिपाठी ने सीएमएस प्रशासन को पत्र भेजकर स्कूल प्रशासन से शाखाओं की मान्यता संबंधी दस्तावेज तलब किए हैं। उन्होंने पत्र के माध्यम से कहा है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 18-ए के अनुसार कोई विद्यालय बिना मान्यता प्रमाण पत्र के संचालित नहीं हो सकता। उन्होंने पत्र के माध्यम से स्कूल प्रशासन को नोटिस भेजा है कि वे अमान्य कक्षाओं को बंद कर उनमें अध्ययनरत छात्रों का निकटतम स्कूल में प्रवेश दिलाएं।
हिंदी की मान्यता पर चला रहे अंग्रेजी माध्यम
स्कूल प्रशासन ने विभाग को मान्यता संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। हालांकि संस्थापक डॉ. जगदीश गांधी ने विभाग को यह जवाब लिखकर दे दिया है कि बेसिक शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर उनके विद्यालय को मान्यता दर्शाई गई है। इसी के आधार उनकेयहां पर आरटीई के तहत बच्चों को प्रवेश दिलाने के लिए भेजा जाता है। बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण मणि त्रिपाठी ने बताया कि विभाग की तरफ से कक्षा 6 से आठ तक हिंदी माध्यम से संचालित करने की मान्यता प्रदान की गई है। विभाग सभी ब्यौरे की जांच कर रहा है।
साख को धूमिल करने की कोशिश : गांधी
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सीएमएस के संस्थापक डॉ. जगदीश गांधी का कहना है कि स्कूल की साख को धूमिल करने की कोशिश की जा रही है। हमारी सभी शाखाओं की मान्यता है। बेसिक शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर भी यह स्पष्ट है। तभी वे हमारे यहां पर आरटीई के तहत बच्चों को प्रवेश के लिए भेजते हैं।
चल रही जांच
बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण मणि त्रिपाठी ने कहा कि शिकायती पत्र मिलने पर उनसे मान्यता संबंधी दस्तावेज मांगे गए थे। स्कूल प्रशासन ने दस्तावेज तो नहीं दिया, पर अपना जवाब भेज दिया है। विभागी स्तर पर जांच चल रही है।