गोंडा से मनोज वर्मा अपनी पत्नी सुनीता और दो मासूम बच्चों को लेकर मुंबई जाने के लिए सुबह 11 बजे लखनऊ जंक्शन पहुंचे।
दोपहर तीन बजे उनको पता चला कि पुष्पक एक्सप्रेस तो 13 घंटे लेट हो गई है। खुले आसमान के नीचे मनोज वर्मा सुबह चार बजे तक इंतजार करते रहे।
मनोज वर्मा समेत करीब एक हजार आम यात्रियों पर शनिवार की रात काफी भारी पड़ी। नासिक में रेल हादसे के बाद पुष्पक एक्सप्रेस 13 घंटे देर से लखनऊ पहुंची।
इसके चलते शनिवार शाम 7:45 बजे मुंबई रवाना होने वाली महिला यात्री, बच्चों और बुजुर्गों को 16 से 18 घंटे तक खुले में आसमान के नीचे सर्दी में रात काटनी पड़ी।
13 घंटे लेट से आई ट्रेन
शाम छह बजे तक जब ट्रेन के जाने के बारे में कोई पता नहीं चला तो उन्होंने पूछताछ काउंटर पर जानकारी की। पता चला कि ट्रेन 13 घंटे लेट हो गई है। दोपहर करीब तीन बजे तक पुष्पक एक्सप्रेस के मुंबई जाने के लिए 1200 से अधिक टिकट बिक गए थे।
लेकिन ट्रेन लेट होने से हजारों यात्री खुले आकाश के नीचे रात गुजारने को मजबूर हुए। प्लेटफार्म पर शेड न होने की वजह से लंबी लाइन में लगे मासूम बच्चे भी सर्दी से सिहर गए।
खास यात्रियों का है जंक्शन
हावड़ा रेलवे स्टेशन की तर्ज पर रेलवे ने लखनऊ जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर 6 तक वाहनों के जाने के लिए कैब-वे तो बना दिया लेकिन प्लेटफार्म पर शेड तैयार नहीं किया गया।
पुष्पक एक्सप्रेस सहित मुख्य ट्रेनों से जाने वाले यात्री अपनी गाड़ियों से कैब-वे के रास्ते सीधे प्लेटफार्म तक पहुंच जाते हैं।
जबकि अनारक्षित श्रेणी में यात्रा करने वाला आम यात्री खुले आकाश के नीचे बैठकर शाम ढलने का इंतजार करता है।
पुष्पक एक्सप्रेस को लखनऊ जंक्शन के प्लेटफार्म एक से भी चलाया जा सकता है लेकिन रेलवे इस पर कोई निर्णय लेने को तैयार ही नहीं है।