प्रदेश के प्रमुख विद्युत उत्पादन गृहों में अब भी कोयले के किल्लत बनी हुई है। ओबरा, अनपरा, पारीक्षा और हरदुआगंज विद्युत उत्पादन गृहों में मात्र 2 से 4 दिन के लिए ही कोयला उपलब्ध है। वहीं, बुधवार को बिजली की मांग 23538 मेगावाट तक पहुंचने के कारण विद्युत आपूर्ति प्रभावित हुई है। शहरी क्षेत्रों में स्थिति में कुछ सुधार हुआ है, पर ग्रामीण इलाकों में बिजली संकट अब भी बना हुआ है।
इससे निपटने के लिए उप्र पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन द्वारा 2000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली खरीदने के बावजूद भी बुधवार को बिजली की उपलब्धता और मांग में 2 से 2.5 हजार मेगावाट का अंतर बना रहा। वहीं ललितपुर पावर प्लांट की 660 मेगावाट क्षमता की इकाई से बुधवार को विद्युत उत्पादन शुरू हो गया है और अन्य बंद इकाईयों को जल्द शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक अनपरा विद्युत उत्पादन गृह को पूरी क्षमता से चलाने के लिए 40000 मिट्रिक टन कोयले की आवश्यकता थी, लेकिन बुधवार को मात्र 31000 एमटी कोयला ही उपलब्ध हो पाया। यानी अनपरा पावर प्लांट के पास मात्र 4 दिन का ही कोयला शेष बचा है। ओबरा विद्युत उत्पादन गृह को 12500 के स्थान पर 11500 एमटी और हरदुआगंज थर्मल पावर प्लांट को 19000 के स्थान पर मात्र 11500 एमटी ही कोयला मिल पाया। इस प्रकार हरदुआगंज के पास 4 दिन और और ओबरा के पास 3 दिन का ही कोयला बचा है।
जबकि पारीक्षा पावर प्लांट को 15500 के स्थान पर 3500 एमटी ही कोयला उपलब्ध कराया जा सका है। यहां भी अब 2 दिन का ही कोयला उपलब्ध है। इसका सीधा असर बिजली उत्पादन पर पड़ रहा है। अधिकारियों के मुताबिक बुधवार को बिजली की उपलब्धता और मांग में भारी अंतर होने के बावजूद जिला, तहसील और नगर पंचायत मुख्यालयों पर बिजली आपूर्ति शेड्यूल के मुताबिक ही की गई।