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आउटसोर्सिंग नियुक्तियों में खत्म हो सकती है एजेंसियों की मनमानी, सीएम ने लिया शिकायतों का सज्ञान

Sun, 28 Oct 2018 11:35 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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सीएम आदित्यनाथ योगी - फोटो : डेमो
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प्रदेश सरकार आउटसोर्सिंग के जरिए की जाने वाली भर्तियों में होने वाली मनमानी दूर करेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसके लिए पहल की है। उन्होंने एक नवंबर को उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा सहित पांच प्रमुख मंत्रियों और शासन के आठ वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलाई है। 

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इसमें आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्मिकों की भर्ती के लिए मुकम्मल नीति तैयार की जाएगी। प्रदेश सरकार नियमित भर्तियों की जगह आउटसोर्सिंग एजेंसियों से भर्ती को प्रमुखता दे रही है। चतुर्थ श्रेणी के रिक्त हो रहे पदों पर इसी प्रक्रिया से भर्ती की व्यवस्था बना दी गई है।

इसके अलावा केंद्र व राज्य सरकार के निश्चित समय वाले प्रोजेक्ट में भी इसी आधार पर भर्तियों को तवज्जो दी जा रही है। इसमें चतुर्थ श्रेणी से लेकर बड़े स्तर के पद भी शामिल हैं। आउटसोर्सिंग से होने वाली भर्तियों के लिए सरकार की कोई नीति न होने से विभाग अपनी आवश्यकता के लिहाज से दिशानिर्देश तय कर भर्ती कराते हैं।
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कर्मचारी संगठन लगातार शिकायत करते रहे हैं कि आउटसोर्सिंग एजेंसी के चयन से ही सिफारिश, जुगाड़ और लेन-देन का जो खेल शुरू होता है, वह कर्मचारियों की भर्ती, भुगतान और रिन्युवल तक चलता रहता है। इस वजह से कर्मचारियों का हर स्तर पर शोषण होता है।

पिछले दिनों मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडेय ने कर्मचारी संगठनों की आउटसोर्सिंग की भर्तियों में  शिकायतों का संज्ञान लेकर अपर मुख्य सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति गठित करने का आदेश दिया था।

अब मुख्यमंत्री योगी ने इस समस्या पर विचार करने और एजेंसी चयन से लेकर भर्ती, भुगतान और रिन्युवल में होने वाले खेल को समाप्त करने के लिए आउटसोर्सिंग नीति बनवाने की पहल की है। 

मुख्यमंत्री की बैठक में ये होंगे शामिल

डॉ. दिनेश शर्मा उप मुख्यमंत्री (मंत्री आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स के रूप में), स्वामी प्रसाद मौर्य श्रम एवं सेवायोजन मंत्री, राजेश अग्रवाल वित्त मंत्री, सत्यदेव पचौरी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री, चेतन चौहान व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री। डॉ. अनूप चंद्र पांडेय मुख्य सचिव, संजीव मित्तल अपर मुख्य सचिव वित्त, मुकुल सिंघल अपर मुख्य सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक, आलोक सिन्हा अपर मुख्य सचिव आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, सुरेश चंद्रा प्रमुख सचिव श्रम, एमडी यूपीएसआईडीसी, एमडी यूपी डेस्को व एमडी यूपीएलसी।

आउटसोर्सिंग भर्ती को लेकर कर्मचारी संगठनों की शिकायतें

  • चयन प्रक्रिया पारदर्शी न होने के कारण सेवा प्रदाता भर्ती का समुचित विज्ञापन नहीं करते।
  • मनमाने तरीके से मनचाहे लोगों की भर्ती। आवेदकों का आर्थिक शोषण।
  • कई जगह आउटसोर्सिंग एजेंसियों से एक से अधिक कर्मी लिए जाते हैं। अंतिम तौर पर विभाग चयन करते हैं। अभ्यर्थियों का दो स्तर पर शोषण होता है।
  • कर्मियों को वास्तविक रूप से पूरा मानदेय नहीं मिल पाता है। कई एजेंसियां खाते में तो पूरा भुगतान करती हैं लेकिन कर्मी से कुछ हिस्सा वापस ले लेती हैं।
  • नीति न होने से कर्मचारी का मानदेय अलग-अलग विभाग में अलग-अलग होता है।
  • वास्तविक रूप से महीने में पूरे दिन काम लिया जाता है। सरकार पूरा मानदेय देती है, लेकिन एजेंसियां भुगतान 26 दिन का करती हैं। बीच में छुट्टी लेने पर पैसा काट लिया जाता है। 
  • सरकार एजेंसियों को समस्त करों सहित एडवांस मानदेय उपलब्ध कराती हैं लेकिन कर्मियों को प्राय: समय पर भुगतान नहीं मिल पाता।
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रिक्त पदों पर नियुक्त संविदा कर्मियों का नियमितीकरण राम भरोसे

जानकार बताते हैं कि लंबे समय से कई विभागों में रिक्त पदों के सापेक्ष संविदा पर कर्मचारी कार्यरत हैं। सरकार दिसंबर 2001 तक नियुक्त कर्मियों को नियमित कर चुकी है। इसके बाद नियुक्त संविदा कर्मी नियमित होने की बाट जोह रहे हैं। सृजित पद पर नियुक्ति होने की वजह से संविदाकर्मी को मूल वेतन व महंगाई भत्ता, आकस्मिक अवकाश मिलता है। नियमित न होने से इन्हें एचआरए व नगर प्रतिकर भत्ता नहीं मिलता। आउटसोर्सिंग कर्मियों के बारे में योगी सरकार की पहल से संविदा कर्मियों को भी अपने दिन बहुरने की उम्मीद बढ़ गई है।
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