योगी आदित्यनाथ ने मध्यप्रदेश में 17, छत्तीसगढ़ में 23, राजस्थान में 26 और तेलंगाना में 8 सभाएं कीं। छत्तीसगढ़ में भिलाई, राजनांदगांव, कबीरधाम, दुर्ग, कोरबा, रायगढ़ आदि में उनकी सभाएं हुईं तो राजस्थान में नागौर, गंगानगर, बारां, चित्तौड़गढ़, कोटा, सीकर, चूरू, जैसेलमेर सहित कई जगह सभाएं हुईं। मध्यप्रदेश में विदिशा, उज्जैन, रायसेन, धार, खंडवा, रतलाम, सागर, इंदौर, भोपाल व सीहोर में सभाएं हुईं।
कर्नाटक, त्रिपुरा और गुजरात में तो योगी जिन क्षेत्रों में गए, वहां ईवीएम से निकले वोटों ने यह साबित कर दिया कि वे भाजपा के लिए वोट जुटाने वाले चेहरा बन चुके हैं। उन्होंने कर्नाटक, त्रिपुरा और गुजरात में उत्तर प्रदेश से सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रिश्तों को जोड़कर तो भगवान राम के सहारे समीकरणों को धार देकर भाजपा के पक्ष में माहौल बनाया। नाथ संप्रदाय के समीकरण भी बैठाकर भाजपा को लाभ दिलाया। इन तीन राज्यों के चुनावी तेवर मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और तेलंगाना में भी दिखे।
योगी ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, हनुमान, अयोध्या, हिंदुत्व और अली बनाम बजरंगबली जैसी बातों से भाजपा के चुनावी रंग को गाढ़ा किया। तेलंगाना में ओवैसी पर हमला कर हिंदुत्व के समीकरणों को धार दी। योगी के समीकरण भाजपा की जीत में कितने सहायक होंगे, यह तो नतीजों से पता चलेगा लेकिन उन्होंने यह साबित कर दिया कि उनके रूप में भाजपा को विपक्ष को अपनी बातों से बेचैन कर देने वाला एक नेता और मिल गया है।