पिछली समाजवादी सरकार के दौरान यूपीपीएससी के जरिये हुई भर्ती की जांच की सिफारिश की थी। 1 अप्रैल, 2012 से 31 मार्च, 2017 के बीच हुई भर्ती में हुई अनियमितता की जांच सरकार ने सीबीआई को सौंपी दी थी। जांच के दौरान सीबीआई को शिकायत मिली कि 2010 में अपर निजी सचिव के 250 पदों पर हुई भर्ती में भी घालमेल है।
यह भर्ती प्रक्रिया मायावती सरकार में शुरू हुई थी। अखिलेश सरकार के दौरान तीन चरणों में परीक्षा हुई और दो चरणों के परिणाम घोषित हुए। योगी सरकार आने के बाद तीन अक्तूबर 2017 को इस भर्ती के अंतिम परिणाम घोषित किए गए और आनन फानन में चयनित किए गए 237 अभ्यर्थियों में से अधिकतर को जॉइन करा दिया गया। मामला 1 अप्रैल 2012 से पहले शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया का था जो 31 मार्च 2017 के बाद तक चली।