संचारी रोगों पर सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश नो क्लाइमेटिक जोन का प्रदेश है। अलग-अलग क्षेत्र में अलग-अलग बीमारी भी आती है। आप देखेंगे कुशीनगर, गोरखपुर से लेकर नेपाल की तराई से सहारनपुर तक मस्तिष्क ज्वर का कहर कभी इस क्षेत्र में हजारों बच्चों को हर वर्ष निगल लेता था। एक वर्ष से 15 वर्ष तक के बच्चे इसकी चपेट में आते थे। लोगों के मन में जुलाई से लेकर नवंबर-दिसंबर तक भय और दहशत का माहौल रहता था। वाराणसी और इसके आसपास के क्षेत्र में कालाजार फैलता था। बरेली और आसपास के क्षेत्र में मलेरिया, लखनऊ-कानपुर-मथुरा तक डेंगू का कहर देखने को मिलता था। झांसी और बुंदेलखंड के क्षेत्र में चिकनगुनिया का कहर था।
स्वास्थ्य विभाग ने विगत 6 वर्ष के अंदर कार्यक्रम चलाया,जिसमें कई विभागों की सहभागिता रही। आज से ठीक 5 वर्ष पहले एक अप्रैल 2018 को संचारी रोग नियंत्रण का शुभारंभ किया। इन कार्यक्रमों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रदेश के विभागों के साथ भारत सरकार और यूनिसेफ, डब्ल्यूएचओ जैसी संस्थाओं का योगदान रहा। आज संचारी रोग नियंत्रण के लिए उत्तर प्रदेश का यह मॉडल पूरे देश के सामने एक अच्छे परिणाम के रूप में सामने आया है। आज इंसेफेलाइटिस को अंतर विभागीय समन्वय के कारण पूरी तरह नियंत्रित किया जा चुका है। चिकनगुनिया, मलेरिया, कालाजार जैसी बीमारियों के निदान में उत्तर प्रदेश का कार्य उत्कृष्ट श्रेणी का है।
स्कूलों में चलाएं स्वच्छता कार्यक्रम
संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम और स्कूल चलो अभियान की एक साथ शुरुआत को लेकर सीएम योगी ने कहा कि इन बीमारियों की चपेट में ज्यादातर बच्चे आते थे। इसीलिए स्कूल चलो अभियान और संचारी रोग नियंत्रण का यह कार्यक्रम एक साथ आयोजित किया गया है। इसमें सबसे बड़ी भूमिका स्वच्छता और शुद्ध पेयजल की है। इसमें शिक्षकों का रोल भी महत्वपूर्ण है। उनका काम केवल स्कूल में पाठ्यक्रम पढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि अभिभावक के साथ भी संवाद बनाना होगा। शिक्षक गृह भ्रमण के दौरान देखें कि घर के आसपास गंदगी तो नहीं है। इस विषय पर भी वो अभिभावकों से संवाद करें। स्कूलों में स्वच्छता के बारे में एक कार्यक्रम को आगे बढ़ाना होगा। ग्राम प्रधान समिति के साथ बात करते हुए अभिभावकों को भी प्रेरित करना होगा। स्कूल में जो बच्चे आते हैं उन्हें भी देखना। यूनिफॉर्म साफ सुथरी हो, बच्चे नहाकर आएं, दातून करके आएं। स्वच्छता के प्रति बच्चों को जितना जानकारी दे पाएंगे, संचारी रोग को नियंत्रण करने में उतनी ही सफलता मिलेगी।
एक टीबी मरीज की जिम्मेदारी लें शिक्षक
सीएम योगी ने कहा कि 2 वर्ष में हमें हर मरीज को टीबी से मुक्त करना है। इसके लिए बड़े कार्यक्रम चल रहे हैं। हो सके तो हर शिक्षक ग्राम समाज में एक टीबी मरीज की जिम्मेदारी ले, सरकार उन्हें सहायता देगी। टीबी मरीजों के लिए कुछ दवा के पैकेट आते हैं। वो दवा मरीजों को उपलब्ध कराने में मदद करें। रोगियों को मास्क लगाने के लिए, दवा लेने के लिए जागरूक करें। एक शिक्षक एक भी टीबी मरीज को बीमारी से मुक्त कराएगा तो बहुत बड़ा काम होगा। हमारे पास 6 लाख शिक्षक हैं, अगर वो इसे अभियान का हिस्सा बना लें तो देश के अंदर यह मॉडल बन जाएगा। इस बड़े अभियान को हमें अपने हाथ में लेना चाहिए। व्यापक जागरूकता ही इन बीमारियों से मुक्ति का माध्यम बनेगा। इस दौरान कार्यक्रम में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, कृषि उत्पादन आयुक्त एवं औद्योगिक विकास आयुक्त मनोज कुमार सिंह,अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा दीपक कुमार और प्रमुख सचिव चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण पार्थसारथी सेन शर्मा उपस्थित रहे।
वेक्टर कंट्रोल वाहनों का भी किया फ्लैग ऑफ
स्कूल चलो अभियान-2023 और संचारी रोग नियंत्रण अभियान की शुरुआत के साथ ही शनिवार को सीएम योगी ने लोकभवन में वेक्टर कंट्रोल वाहनों का भी फ्लैग ऑफ किया। सीएम योगी के फ्लैग ऑफ करते ही ये वेक्टर कंट्रोल वाहन अपने गंतव्यों की ओर रवाना हो गए। उनके साथ डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक भी उपस्थित थे।