मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तबादलों को लेकर चर्चा में आए मंत्रियों को कैबिनेट विस्तार में विभागों की अदला-बदली के जरिए ही संदेश नहीं दिया, बल्कि प्रभारी मंत्री बनाने में भी उनकी हदें तय कर दीं। पहली बार मंत्री बनने पर जहां वे दो-दो जिलों के प्रभारी बनाए गए थे, वहीं बदली परिस्थिति में वे एक जिले तक ही सीमित कर दिए गए। सियासी गलियारे में मुख्यमंत्री के ये फैसले चर्चा का विषय बने हैं।
योगी सरकार के सत्ता में आने पर सिद्धार्थनाथ सिंह को आम जनता से सीधे जुड़े चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग का मंत्री बनाया गया था। मनमाने तबादलों से सरकार की किरकिरी के बाद मंत्रिमंडल विस्तार में सिंह से यह विभाग लेकर खादी, रेशम, वस्त्र, एमएसएमई, निर्यात व निवेश प्रोत्साहन के साथ एनआरआई मंत्री बना दिया गया।
जनता के बीच ये सभी विभाग स्वास्थ्य महकमे के बराबर नहीं माने जाते। इसके बाद प्रभारी मंत्री बनाने का समय आया तब सिद्धार्थनाथ को फिर संकेत दिया गया। मुख्यमंत्री ने उन्हें केवल एक जिले गोंडा का प्रभार मंत्री बनाया है। इसके पहले वह मेरठ जैसे बड़े जिले के साथ बस्ती के भी प्रभारी थे।