किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी अब और भी आधुनिक सुविधाओं से लैस हो गई है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोमवार को यहां 153 करोड़ रुपये की सुविधाओं का लोकार्पण किया।
इनमें मुख्य रूप से लीनियर एक्सीलिरेटर, डिजिटल मैमोग्राफी, गेट लैब, डिजिटल सबट्रैक्शन एंबुलाइजेशन (डीएसए), इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप, स्लाइड स्कैनर मशीन, पीडियाट्रिक आईसीयू और ट्रॉमा सेंटर का तो तत्काल मरीजों को फायदा मिलने लगा।
कार्डियोलॉजी विभाग के विस्तार, बेड की क्षमता दोगुनी करने से लेकर कैथ लैब की संख्या भी जल्द ही बढे़गी। जानिए इन सुविधाओं से इलाज के तौर-तरीकों में क्या बदलाव आएंगे, मरीजों को क्या फायदा होगा।
गेट एंड मोशन लैब :मांसपेशियों का हो सकेगा सटीक इलाज
1.99 करोड़ रुपये की लागत से केजीएमयू के डिपार्टमेंट ऑफ फिजिकल मेडिसन एंड रिहैबिलिटेशन (डीपीएमआर) में अत्याधुनिक गेट एंड मोशन लैब स्थापित की गई है।
फायदा क्या : लैब की अत्याधुनिक मशीनों से निशक्तों के पैरों की मांशपेशियों की कार्यप्रणाली को डिजिटली रिकॉर्ड किया जा सकता है। लैब में एक मैट पर मरीज को चलने के लिए कहा जाता है। इस दौरान उसकी दो अलग-अलग एंगल से वीडियो फिल्म बनायी जाती है।
मैट में लगे सेंसर उसके पैर के पड़ने वाले दबाव को रिकॉर्ड करते हैं जो कम्प्यूटर में दर्ज होता रहता है। इससे मांसपेशिया, हड्डी के जोड़ों और चलने के तरीके का विश्लेषण कर समस्या की तह तक पहुंचा जा सकता है। यानी आसानी से पता लगाया जा सकता है कि मांशपेशियों पर कहां-कितना दबाव पड़ता है, क्या रुकावटें आ रही हैं और उसका सटीक उपचार किया जा सकता है।
डिजिटल सबट्रैक्शन एंजियोग्राफी : सिकुड़ी नसों को खोलने व रूकावटों को दूर करने में मिलेगी मदद
रेडियोडायग्नोसिस विभाग में स्थापित डिजिटल सब्सट्रैक्शन एंजियोग्राफी (डीएसए) की सुविधा शुरू हो गई। विभाग में पांच करोड़ की लागत से ये मशीन लगाई गई है।
फायदा क्या : इससे शरीर के किसी भी अंग की धमनी (आर्टरी), शिरा (वेन) में पैदा हुई रुकावट को देखा जा सकता है। साथ ही उसे खोला भी जा सकता है। यही नहीं किसी ट्यूमर से हो रहे रक्तस्राव, मस्तिष्क में विकसित हो रहे किसी ट्यूमर में खून की आपूर्ति को रोकने, सिकुड़ चुकी नसों को खोला जा सकता है।
गुर्दे में होने वाली दिक्कत हो या फिर मस्तिष्क में हो रहा रक्तस्राव, इस तकनीक में सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती सिर्फ नसों और धमनियों के रास्ते ही जाकर इलाज किया जा सकता है। यूरोलॉजी विभाग के मरीज की सर्जरी करते समय उसके रक्तस्राव को रोकने के लिए डीएसए तकनीक की मदद ली गई थी। अभी तक ये सुविधा सिर्फ एसजीपीजीआई में ही थी।