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18 हजार करोड़ का नुकसान, बौखला गए अखिलेश

Sun, 28 Jun 2015 02:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शनिवार को नीति आयोग में 14वें वित्त आयोग की रिपोर्ट और केंद्रीय योजनाओं के पुनर्गठन से यूपी को होने वाले नुकसान का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों से सलाह लिए बिना केंद्रीय योजनाओं के प्रारूप में बदलाव से राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ गया है।
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14वें वित्त आयोग की रिपोर्ट से यूपी को 9000 करोड़ के नुकसान का अनुमान है। केंद्रीय योजनाओं में केंद्रांश में बदलाव और कुछ अन्य स्कीमों के लिए बजट व्यवस्था न होने से यूपी को 18000 करोड़ रुपये कम मिलेंगे।

नीति आयोग में एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में सेंटर स्पॉंसर्ड स्कीम के रेशनलाइजेशन के लिए गठित मुख्यमंत्रियों के सब ग्रुप की बैठक में अखिलेश ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहकारी संघवाद के सिद्धांतों पर चलने के लिए जरूरी है कि केंद्र सरकार, राज्यों के साथ मिलकर नीतियां बनाए और विकास की गति बढ़ाई जाए।
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उन्होंने कहा कि 2015-16 के केंद्रीय बजट में राज्यों से राय लिए बिना केंद्र पुरोनिधानित योजनाओं का पुनर्गठन कर दिया गया। केंद्र से राज्यों को मिलने वाली हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 कर तो दी गई, लेकिन फॉरेस्ट कवर को अत्यधिक महत्व दिए जाने का फॉर्मूला लागू करने से यूपी को करीब 9000 करोड़ रुपये कम मिलेंगे।

नुकसान बढ़ने वाली केंद्रीय हिस्सेदारी से ज्यादा

मुख्यमंत्री ने कहा, वर्ष 2015-16 के बजट में कई योजनाओं के लिए बजट का प्रावधान नहीं किया गया। कुछ योजनाओं में केंद्र के शेयर में बदलाव कर दिया गया। इससे यूपी को मिलने वाली राशि में करीब 18,257 करोड़ रुपये की कमी का अनुमान है।

यह नुकसान केंद्रीय हिस्सेदारी 10 फीसदी बढ़ाने से मिलने वाली राशि से 7584 करोड़ रुपये अधिक है। उन्होंने कहा कि कोर ऑफ कोर स्कीम में कई अन्य योजनाओं को शामिल किया जाना चाहिए और उनके वर्तमान वित्त पोषण की व्यवस्था को बनाए रखा जाना चाहिए।

अन्यथा, कोर सेक्टर की योजनाओं का, चाहे वे किसानों से जुड़ी हों या स्वास्थ्य सेवाओं से, आकार कम हो जाएगा। राज्य के विकास पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। कम से कम कोर सेक्टर की योजनाओं में केंद्र द्वारा उपलब्ध कराए गए संसाधनों में कोई कमी न की जाए।

इन्हें कोर ऑफ कोर स्कीम में शामिल किया जाए ताकि राज्य की जनता के प्रति वचनबद्धता पूरी हो सके और प्रधानमंत्री का सहकारी संघवाद का सिद्धांत वास्तव में साकार हो सके।

अखिलेश ने कहा कि कोर ऑर कोर स्कीमों में मनरेगा और सामाजिक समावेशन की योजनाओं को ही शामिल किया गया है। इनमें शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अवस्थापना सुविधाओं का सृजन, कृषि, ऊर्जा, मानव संसाधन विकास, स्वास्थ्य, नगरीय विकास, गरीबी उन्मूलन, ग्राम्य विकास आदि को भी शामिल किया जाए।

इन योजनाओं में पहले की तरह हो वित्त पोषण

मुख्यमंत्री ने सब-ग्रुप द्वारा इन क्षेत्रों की योजनाओं को 60/40 अनुपात में वित्त पोषित किए जाने की संस्तुति पर कहा कि राज्यों के लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, त्वरित सिंचाई लाभ परियोजना, इंदिरा आवास योजना, मध्याह्न भोजन, सर्व शिक्षा अभियान, समेकित बाल विकास कार्यक्रम, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना आदि में पहले की तरह वित्त पोषण के आधार पर केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराई जाए।

आंगनबाड़ी, आशा के लिए मिलती रहे मदद
अखिलेश ने सब-ग्रुप द्वारा आशा कर्मियों, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों तथा अनुबंधित शिक्षकों के वेतन आदि के वर्तमान स्तर के आधार पर आगामी दो वर्षों तक राज्यों को सहायता उपलब्ध कराए जाने की संस्तुति के संबंध में कहा कि ये सभी महत्वपूर्ण कार्यक्रम हैं तथा आगे भी चलेंगे। इसलिए वेतन आदि के लिए सहायता दो वर्षों के आगे भी जारी रहनी चाहिए।
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ई गवर्नेंस, बीआरजीएफ को डी-लिंक न किया जाए

सीएम ने कहा कि केंद्रीय बजट में कुछ योजनाओं को केंद्रीय सहायता से डी-लिंक कर दिया गया है। भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय ई-गवर्नेन्स एक्शन प्लान के तहत शत-प्रतिशत सहायता उपलब्ध कराई जाती थी।

ग्रामीण क्षेत्रों में अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि (बीआरजीएफ) के अंतर्गत शत-प्रतिशत सहायता मिलती थी। पुलिस बलों के आधुनिकीकरण के लिए भी राज्य को केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराई जाती थी। इन योजनाओं को केंद्रीय सहायता से डी-लिंक न किया जाए। वे पहले की तरह केंद्रीय सहायता से चलनी चाहिए।

राज्यों को मिले डीपीआर अनुमोदन का अधिकार
मुख्यमंत्री कहा कि जिन योजनाओं में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार किया जाना अनिवार्य हो, उनकी डीपीआर को अनुमोदित करने का अधिकार भी राज्य को दिया जाए। केंद्र पुरोनिधानित योजनाओं के तहत प्रत्येक योजना में 25 प्रतिशत फ्लैक्सी फंड दिए जाने केप्रस्ताव पर भी उन्होंने सहमति जताई।
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