उन्होंने कहा कि हमने लगातार यह प्रयास किया है कि लोकतांत्रिक सरकारें अधिक जवाबदेह बनें और शासन-प्रशासन से जुड़ी चुनौतियों को विधायी स्तर पर उठाया जाए। कई बार विधायी प्रक्रियाओं और विपक्ष की भूमिका को सशक्त करने के प्रयास किए गए हैं जिनके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। आने वाले समय में हम यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे कि राज्य की विधानसभा की न्यूनतम 30 दिन बैठकें हों, जिनमें सहमति और असहमति दोनों के माध्यम से जनहित से जुड़े विषयों पर सार्थक चर्चा हो।
विधानसभा वह मंच है जहां आम नागरिक की आवाज लोकतांत्रिक व्यवस्था के माध्यम से स्थापित होती है। मतदाता मतदान करने के बाद यह अपेक्षा करता है कि अगले पांच वर्षों तक उसका चुना हुआ प्रतिनिधि उसकी समस्याओं और चुनौतियों को उठाएगा तथा उनके समाधान के लिए प्रयास करेगा। जिस प्रकार जनता का विश्वास न्यायालयों में है उसी प्रकार राज्य विधानमंडल पर भी जनता का अटूट विश्वास होना चाहिए कि उसकी बात यहां अवश्य सुनी जाएगी। हमने विधानसभा को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों का उपयोग बढ़ाया है। एआई और नवीन तकनीकों के माध्यम से पुरानी बहसों, चर्चाओं और निर्णयों को अधिक सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा रहा है।
राज्य विधानसभाओं के बीच आपसी संवाद, विधायी सूचकांक, भागीदारी, जवाबदेही और कार्यकुशलता को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। नए नियम, नई प्रक्रियाएं और प्रभावी संसदीय समितियां लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाती हैं।
संविधान के अधीन कार्य करते हुए यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम निष्पक्षता, पारदर्शिता और जनउत्तरदायित्व को सर्वोच्च स्थान दें। जनता हम पर विश्वास करती है और हमें उस विश्वास को और मजबूत करना है।