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राजा भैया को तगड़ा झटका, हत्या पर CBI की क्लोजर रिपोर्ट खारिज

Thu, 17 Sep 2015 11:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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सूबे के खाद्य एवं रसद मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया को जियाउल हक हत्याकांड में भले ही क्लीन चिट मिल गई हो, लेकिन इसी कांड में मारे गए सुरेश यादव की हत्या के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने उन्हें प्रथमदृष्टया दोषी मानते हुए तलब कर लिया है।
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सीबीआई ने इस मामले में सुरेश की मौत को हादसा बताकर फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। अदालत ने इस मामले की सुनवाई करते हुए बृहस्पतिवार को सीबीआई की फाइनल रिपोर्ट खारिज कर दिया।

सीबीआई के विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट मनोज कुमार ने सुरेश यादव की मौत को हत्या बताते हुए राजा भैया के साथ ही अक्षय प्रताप सिंह उर्फ गोपाल जी समेत 15 आरोपियों को हत्या, हत्या की साजिश, बलवा करने और साक्ष्य छिपाने के आरोपों में तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई तीन अक्तूबर को होगी।
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सुरेश की मौत को हादसा बताने वाली सीबीआई की फाइनल रिपोर्ट के बाद कोर्ट ने वादी पवन कुमार यादव को कोर्ट ने नोटिस जारी किया था। तब पवन ने आपत्ति दाखिल कर कोर्ट को बताया कि सुरेश की मौत हादसा नहीं थी। उसे आरोपियों ने सुनियोजित साजिश के तहत मारा। कोर्ट ने तथ्यों के अवलोकन के बाद आरोपियों को तलब कर लिया।

कोर्ट ने इन पर लगाए आरोप

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि राजा भैया, अक्षय प्रताप सिंह, पीए जितेंद्र पाल, संजीव सिंह, गुड्डू सिंह उर्फ संजय प्रताप सिंह तथा राजीव प्रताप सिंह ने सुरेश यादव की हत्या की साजिश रची और षडयंत्र करके नन्हे सिंह, बुल्ले पाल, मुन्ना, कामता, अजय पाल, विजय पाल से हत्या कराई। इसमें तत्कालीन थानाध्यक्ष हथिगंवा मनोज कुमार शुक्ला, तत्कालीन थानाप्रभारी कुंडा सर्वेश कुमार मिश्रा व तत्कालीन सीओ कुंडा जियाउल हक के गनर इमरान सिद्दीकी ने सहयोग किया।

हर साजिश राजा भैया की कोठी पर
तथ्यों से साफ पता चलता है कि गुड्डू सिंह व उसके साथी कई दिन पहले से नन्हे यादव व सुरेश यादव की हत्या की साजिश रच रहे थे।

कोर्ट ने कहा कि 2 मार्च, 2013 को सभी आरोपियों का आपस में बात करना, राजा भैया की प्रतापगढ़ वाली कोठी पर अक्षय प्रताप, नन्हे सिंह, संजीव सिंह व जितेंद्र पाल द्वारा वादी पवन कुमार यादव को बंधक बनाकर दो गलत तहरीर लिखवाने से साफ है कि राजा भैया को इसकी जानकारी थी।
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क्या है मामला

2 मार्च 2013 को कुंडा के प्रधान नन्हे यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसकी सूचना पाकर सीओ जियाउल हक के नेतृत्व में कुंड व हथिगंवा की पुलिस गांव पहुंची, जहां नन्हे के भाई सुरेश यादव की हत्या के बाद सीओ जियाउल की भी हत्या कर दी गई थी। इस मामले में तीन रिपोर्ट दर्ज कराई गई थीं।

सीओ की हत्या को लेकर परवीन आजाद तथा थानाध्यक्ष हथिगंवा ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी वहीं सुरेश यादव की हत्या के संबंध में पवन कुमार यादव ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बाद में तीनों मामलों की विवेचना सीबीआई को सौंप दी गई थी। सीबीआई ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में सुरेश यादव की हत्या को हादसा बताया था।

सीबीआई की विशेष अदालत ने टिप्पणी की ‘सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट ने अपने कई निर्णयों में कहा है कि कोर्ट का कर्तव्य यह है कि वह असली आरोपियों के खिलाफ संज्ञान ले, न कि उन आरोपियों के खिलाफ जिनको पुलिस ने आरोपी बनाकर जेल भेजा हो।’
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