राजधानी के एक प्रतिष्ठित स्कूल में आठवीं के छात्र अजय (परिवर्तित नाम) का भविष्य दांव पर लगने से बाल-बाल बचा।
संपत्ति के लालच में उसकी पढ़ाई और कॅरिअर को किनारे रख आठवीं की ही एक छात्रा से उसका विवाह कराने को माता-पिता उसे सीतापुर के एक गांव ले गए थे।
उसने विरोध किया तो चुप करा दिया गया। लेकिन प्रशासन की सख्ती और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सक्रियता की वजह से शादी समय रहते ही रोक ली गई। पुलिस ने छात्र और छात्रा के पिता को जेल में डाल दिया। गुरुवार को उनकी जमानत हुई।
सीतापुर के एक गांव की नाबालिग लड़की से होने जा रहे इस विवाह की जानकारी लोगों को हुई तो उन्होंने सामाजिक संगठन साझी दुनिया को सूचित किया।
संस्थान की संस्थापक व सचिव डॉ. रूपरेखा वर्मा ने बताया कि शादी 29 अप्रैल को होनी थी। उन्होंने प्रशासन और पुलिस से संपर्क किया और इसे रुकवाने की मांग उठाई।