केस 1 : सिविल अस्पताल में हुई जांच में तेलीबाग बाजार के विनीत यादव को डेंगू की पुष्टि हुई। मरीज अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर पहुंच गया, पर अभी तक उसके घर के आस-पास एंटी लार्वा का छिड़काव नहीं हुआ।
केस 2 : डेंगू के मरीज डालीगंज क्रॉसिंग ब्रांच रोड के मो. साकिब को हालत बिगड़ने पर बलरामपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया। कई दिन तक यहां रहने के बाद लौटने पर भी स्वास्थ्य विभाग व नगर निगम ने इनके घर के पास फॉगिंग नहीं कराई।
केस 3 : मोहनलालगंज के दहियर गांव निवासी इंद्रेश श्रीवास्तव डेंगू की चपेट में थे। निजी अस्पताल में सुधार होने पर उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। इंद्रेश का भी कहना है कि अभी तक घर के पास एंटी लार्वा का छिड़काव नहीं हुआ।
डेंगू साल-दर साल ले रहा जान
2017- 291 लोग चपेट में आए, दो की मौत।
2018- 572 बीमार हुए, एक की मौत।
2019- 1518 चपेट में आए, 6 की मौत।
(ये आंकड़े स्वास्थ्य विभाग के हैं। हालांकि, मौतों का आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा था। कई मामलों में मौतों की वजह कुछ और बताई गई। मसलन शॉक में जाना। हेमरेज। पर, ये सब क्यों हुआ, इस पर जवाब गोल-मोल ही रहा।)
एंटी लार्वा के छिड़काव में स्वास्थ्य विभाग व नगर निगम के 100 कर्मचारी लगे हैं। हालांकि, आबादी के मुताबिक इनकी संख्या 400 के करीब होनी चाहिए। कम कर्मचारी होने से डेंगू के अति संवेदनशील इलाकों में ही छिड़काव व फॉगिंग कराई जा रही है।
महानिदेशालय से मिला था 42 लाख का बजट
स्वास्थ्य विभाग को डेंगू की रोकथाम को एक माह पहले ही 42 लाख रुपये का बजट स्वास्थ्य महानिदेशालय से मिला था। इसमें कर्मचारियों को दो माह के लिए लगाया गया है। अफसरों का कहना है कि नवंबर के आखिर में सभी कर्मचारियों को हटाया जाएगा।
सीएमओ ने कहा-बजट की कमी नहीं, जांच कराएंगे
सीएमओ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल का कहना है कि बजट की कमी नहीं है। वह दावा करते हैं कि सभी जगह दवाओं का छिड़काव हो रहा है। अगर मरीजों के घर के आस-पास छिड़काव नहीं हुआ है तो जांच कराई जाएगी।
नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुनील रावत बताते हैं कि इस समय कुल 31 बड़ी फॉगिंग मशीनें हैं। जितना बड़ा शहर है उस हिसाब से हर वार्ड के लिए कम से कम एक मशीन जरूरी है। 31 में से 27 मशीनें तो वार्डों में भेजी जा रही हैं। अन्य तीन वीआईपी इलाके के लिए है। नगर निगम का कहना है कि हर वार्ड के हिसाब से मशीन होनी चाहिए।